दुनियां उठाए घूमता हूं, सिर पे अपने
एक 'दुनियां' ही.. लिए, ढोता.. हूं, सिर पर, रोज.. मैं, अल.. सुबह से शाम तक! जिंदगी.., ताउम्र... तक.., उतरती.. ही, नहीं जबसे चढ़ी.. मस्तिष्क पर। थोड़ी... अलग है, सच में यह, दुनियां.. से तेरी, शांत है वह! बोलती, कुछ भी नहीं वह। स्वर.. तेरा है, जानता हूँ गूंजता है, गंभीर,... गहरा, हुंकता.. है, कड़कता.. है, बादलों में, तड़कता.. है टूटने से डालियों में रुनझुनाता.. झुनुकता.. है, झुरुकता.. है पवन के संग पत्तियों के संचलन में। टुपकता.. है, टपकने.. से, काली पकी, उन जामुनों, महुवा चुअन में, झर रहे, टुपटुप टुपुकते मीठे.. फलों में, गीत गाता छंद भर.. भर.. बदलियों के बरसने में, बूंद-पत्ती के मिलन में। फूटता है, नदी की जल धार में, गरजता है सागरो में। जानता हूं मधुर हो तुम, रस भरे हो सहज हो, सौंदर्य प्रिय हो! क्या.. इसलिए! हमको बना, मुख मोड कर, बैठे हुए हो। हे प्रभु मेरे! प्रिय हो मुझे, शक्तियां, अपनी.. प्रभो .. हमको.. द...