जब देखता हूं शहर को इस, सिर पीटता हूँ,
ऊंचे उठे हम! सत्य है यह! देखता... हूं, बैठकर! पैंता..लि..सहवें फ्लोर... की.. ! इस.. ऊंचाई पर। आलीशान! अंदर... सोच... से भी वृहत्तर.. ! यह... प्रांगण! बिना जाने, बिना पूछे! नमस्ते! करता हुआ.. किस प्रेम से, दरवांन है, इंट्रेंस... पर..। कितना, सहज! कितना, मधुर, कितना प्रियल! माहौल है, पैसे के बल पर...। अहा! अद्भुत है, महल! जगमगाता... झिलमिली..., इस रोशनी... से, नहाता... हजार कलियों से बना! खिलता हुआ! बहुरंग पुष्पों से गुँथा! स्वचित्र-चित्रण* का ये, कोना...। जान.. है, प्रेस्टीज.. है, खड़े हो, फोटो, खिंच ...चा...ना। कालीन, गुदगुद गुदगुदाते... नरम कितने! लरज़ जातें! स्वच्छ इतने, लांड्री से धुले हों इंग्लैंड के... ! धंसते हुए, उभरते उर-रोज हों, सच! ऐसे हैं, लगते। रंगीन चम! चम! दृश्य, बाहर! पास की, दुनियां से... बिल्कुल, बे-खबर! बाउंड्री के अंदर, पार्क की, कैंपस के लॉन ...