शिवरात्रि है, दिन...आज.. का ।
मित्रों, आज जगज्जननी पार्वती और जगतपिता शिव के परिणय दिवस की वर्षगांठ! महाशिवरात्रि। इसी पर आज की पंक्तियां आप पढ़ खुश हों, शिवशक्ति कृपा आप और हम रहे, कामना करता हूं। शिवरात्रि! है, प्रिय! आज..., दिन... यह! शक्ति.. से, उन.., शिव मिलन का। चेतना से प्रकृति का सम्मिलन.. है आदिशिव से, आदि-मां का... कल्याण जग का। शिवरात्रि! है, प्रिय! आज..., दिन.. यह, शक्ति- शिव के मिलन का। नवल.. नवधा.. दुग्ध, स्निग्धा... खोलती, छवि.. ललछुहीं पटबृंद, उर.. के, पार्वती वह.. तुषार... धवला.. शिवरात्रि है, दिन... आज.. का शक्ति से, उन.. शिव मिलन का। कोमल, मुलायम, नर्म, उर...पट, पंखुरी... से.. हाथ..., मां... के, खोलते.. मुंह, ललछुहे! शिशु.. अधर.. से गुलाबी… से, लाल.. होता, वर्ण है, मां के चिबुक का। शिवरात्रि है, दिन..! आज.. है शक्ति-शिव के मिलन का। खिलने को आतुर! वैभवी... कैसे कहूं! ...