खुशी क्या है।
चित्त तितली बन उड़े, फूल सा हँसता रहे, फटका चिरैया* यह बने.. हल्का रहे, हम खुश रहें कोई बताए न! रास्ता इसके लिए हम क्या करें? तैयार हैं हम, खर्चने को, रोकड़ा, बस, जहां में हमे नित्य नव खुशियां मिलें। प्रसन्न मन, मेरा.. कैसे हो प्रश्न है यह आज का, कल भी रहेगा सिलसिला इस ही तरह.. यह नित्य का। खुशी क्या है, आओ टटोलें बंद मन में, खुले मन से, प्रसन्नता का राज क्या है, चित्त में, इसे मिल के ढूँढें.. मित्रता एक मित्र से, मन के अपने मीत से, रुचि की अपने, सखा हो या सखी अपनी, सुखी हो जो, क्या खुशी है मुझे बताना! कैसा लगा ये तराना.. हां तराना..। पग आगे रखो.. धीमे, धीमे.. और आसाँ खुशी है यदि चाहते हो, पकड़ना इसे पल याद कर लो, प्यार के.. पेंग के उस, जो नहीं तुम पा सके.. सांस हल्के हल्के लो तुम.. और भी आसान हैं ये प्रसन्नता.. जब पुण्यशीला आदमी को सादगी को, शील उस...