एक लम्बा करेक्शन इस व्यवस्था को चाहिए..!
पानी हुआ अब, सर.. से ऊपर देख न, किशोर कैसे? मरे! जल.. कर... जी नहीं.., मारे.. गए..हैं, सभी ये.. मासूम प्रियतर..! उम्र थी, अभी तो इक्कीस अंदर.. फूल थे, खिलते हुए... वे.., बगीचे के... आस में... बेहतर करेंगे..., यहां.. पढ़के, आगे बढ़ेंगे.. पर स्वाहा हुआ सब.. किसकी वजह से...? पानी हुआ अब, सर.. से ऊपर देख न, वे.. मरे! जल कर... जी नहीं..., मारे गए..हैं घेर कर मासूम प्रियतर..! कब तक चलेगा.. राज यह.. यह व्यवस्था..! चोर हैं..! सब .., यहां पर जब...। सड़ चुकी है व्यवस्था..यह घूस खाकर.. भीड़.. है, भीड़ में.. एक तंत्र है, हांफता.. है, साधन नहीं है, धन नहीं है, और न है, आत्म बल! पानी हुआ अब, सर.. से ऊपर देख न, वे.. मरे! जल कर... जी नहीं... मारे.. गए., मासूम प्रियतर..! आदमी..! इस देश का, आदमी..! अब नहीं है, हैवान! है, धन महालोलुप! लालची, मक्कार है, बेइमान है टूटती उन.. सरहदों की हदों तक..! हाय! पैसा, हाय पैसा, कर.. रहा, हर आदमी.., ...