आओ.., कभी भीतर चलें..
मित्रों, मेरे., आज मैं यह चाहता हूं आप.. को, आप.. तक, लेकर चलूं! इन पंक्तियों से, आप पहुंचे, आप.. तक तमन्ना..., करता यही हूँ। आओ.., कभी भीतर चलें.. एक, राज्य.. विस्तृत.. है, यहां! तुम्हारा. है...! तुम्हीं, में.. है, आ, मिलाएं.. आप को हम, आज उससे! मन, इंद्रियों... से, दूर.. प्रिय! अद्भुत, अलौकिक, सच, कह रहा हूँ.. निष्कलुष! निष्पाप! यह, आनंद! मिश्रित । नीर है, देखो तो कैसा! तीर, पर बैठो जरा! जरा, छोड़ दो न! विचारों को, मुक्ति दे दो, क्षण भरों को.. साथ अपने। शांत हो? क्या? सोच लो! मुक्त हो? अब! विचारों से? पग रखो, तुम पास-अपने* नजदीक आओ, बहुत.. धीमे। मन, चुप! खड़ा है, विचारों.. बिन! क्या! वहां? थोड़ी देर देखो, मित्र इसको..। जिस.., पटल पर, रिपोर्टिंग, मन कर रहा था, बस उसी पर ध्यान कर तो। अंतस्थल, यही है, पृष्ठ है, संसार जिस पर आ चिपकता.....