देखो तो उनको
मित्रों सफलता हमें आज अपनों से दूर कर रही है, इसी पर ये लाइने आपको भी अच्छी लगें। अरे ओ.. शिखर के शिराओं पर दिपदीपाते दीप जलते लव नाचती ले.. हवाओ संग.. सुनहरी रंगत भरे.. स्वर्ण से? पुलकित हो कितने, एक हो बस अकेले उतने ऊँचे, पर ध्यान रखो स्नेह नीचे जमीं पर है तुम्हारा! उन्हीं का आशीष पाकर, हृदय.. का तुम स्नेह लेकर जल रहे हो, " क्या उन्हीं से" ? कौन हैं ये.. धरातल पर आम जन, स्नेह है इन सभी का बातियों तेरी भरा आधार नीचे यही हैं तुम्हारा, सर्वदा.. और तुम किनके: लिए.. ऊंचे.. वहां पर, जल रहे हो? कभी तो नीचे भी सोचो... समता को देखो समाज में, एक सी दिखती है क्या..? ये क्या करेंगे... स्पीड की वो.. गाड़ियां! उड़ते हुए 'जहाज नभ में' इनके लिए स्कूल दे दो, चार अक्षर पढ़ सके, नज़दीक घर के। एक टीचर प्राथमिक हर गांव में, पढ़ाई को एक प्यारी नर्स हर बाजार में, दवाई को, प्राथमिक! एक कमरा बहुत छोटा उन्हें दे दो। और क्या इन्हें चाहिए बच्चे हैं ये, बूढ़े ह...