थकने नहीं देगी तुम्हे ।
थकने नहीं देगी तुम्हे ये भूख है, तमन्ना, आशा है प्यारे! आस.. है, संसार की, रंगरूप की स्वर्ण की चमचम चमकती रश्मियों की खींचतीं हैं चित्त तेरा बांध लेती हैं तुझे मनोहर प्रिय, छुलछुल छलकते रेशमी उन बंधनों में.. अत्यंत धीमे.. और धीमे.. और तूं.. फिर तड़फड़ाता अंत में, एक दिन कोने में मिलता यहीं इस संसार में.. अकेले एकांत में, कुछ बुदबुदाता बेकार था, यह खेल.. सारा! जो नहीं बंधते हैं इनमें, लुभावने, चमचम चमकते बंधनों में, उनके लिए, पिंजरा.. अलग है पास उसके, अस्तित्वनी वह! छद्मिनी वह! शक्तिनी वह! ग़ज़ब है, पाश है हाथों में उसके। बांध लेती ज्ञान के , बल बुद्धि के विवेक के, तर्क के.. आयाम में..। उलझा है लेती, विद्वान को सन्यासियों को पुस्तकों में, मौन में, समाधि में। फिर झुलाती है झूलना... यश कीर्ति का, सम्मान का, नाम का रिद्धि, सिद्धि का, नजदीकियों का, अपने से त्याज्य इस संसार मे...