माहौल..! क्या है? आज... का,
माहौल..! क्या है? आज... का, और.... कहां.. है, खड़े हम...? इस आदमी.. की, दौड़.. में, पास.. हैं, या... दूर... हैं हम! आज के इस हाल में, उम्मीद किससे! करें, हम! आदमी.. की, अपेक्षा.. से, देख न ..! कितने हैं! नीचे! खड़े हम.। और, कितने.., दिन.. लगेंगे बस.. आदमी हम..., बन.. सकें, थोड़ा.. ठीक से। पशु हमे, मालिक कहें.. हत्यारा नहीं, अपने मनों में। मैं.. पूछता हूं! रूप.. में, विज्ञान.. में, युद्ध.. में, शैतानियत! संग्राम... में हम.. बहुत आगे, सबसे.. आगे, आज हैं बस नाश.. में..! विनाश में प्राकृतिक भंडार में। बस आदमी की दौड़ में पिछड़े हुए हैं.. आज तक, खुद पर विवश हैं! वह, हम सभी ही, आदमी हैं। हम दूर.. क्यों है? आदमी की, अपेक्षा.. से? अरे! क्योंकि जन्म से हम, यहां पर, .. विविध बंधो.. में, बंधे.. हैं मनुष्यों के बंध में। मुक्त तो, हम हैं नहीं! गुलाम ही हैं! सोच ...