विभाजन! वह है कहां ?
सभी मित्रों को चैत्र नवरात्रि की और हिंदू नववर्ष की हमारी ओर से बधाई और शुभकामनाएं। उन शक्ति के ऊपर ही ये पंक्तियां पढ़ें। विभाजित है, विश्व यह! कितने.. धड़ों में...! तरीकों.. में, एक.. ही, बिचारी.. इस! जिंदगी को, खींचने में। उपलब्धियों की दौड़ में, यह..! हांफता.. है, दौड़ता है, भागता... है। स्वर्ग सा..! एक लोक...! रक्खे.., जेब... में। विभाजित.. है, विश्व यह! कितने.. धड़ों में...! भूला... हुआ है, पीठ अपनी! भारी, है, कितनी.., लद.. चुकी, उम्र भी तो, अरे! इसकी, देख! कितनी.., ढल चुकी। ढो सकेगा, और...? यह..! संभव.. नहीं! अब तो बस, ढो रहा! आदतन इच्छा बची । यह नशेड़ी... है, नशे.. की, इसे लत लगी... अन्यथा, बहुत.. है, जी सके यह, और.. आगे, जिंदगी! पर श्राप है, इस...! आदमी की प्यास! मिटती.. ही, नहीं। एक्, नशा! यह... जिंदगी है! उपलब्धियों का, और... क...