कैसी बुनी! है.., दुनियां हमने,
मित्रों, आप सभी को श्रीशुभ श्रीरामनवमी की अनंत शुभकामनाएं। तत् आज का युद्ध और उसके हालात पर कुछ लाइने प्रस्तुत हैं। इनमें कारण क्या है युद्ध का इसे भी आप स्पर्श करें, यह मर्म है और आदमी आदमी होता तो अच्छा होता। काश! व्यापारी न होता। आ... देख न! कैसी बुनी! है.., दुनियां हमने, साथ.. मिलकर..! मित्र.. मेरे, परेशां... हर आदमी हैं, ग्लोब का इस ! हर जगह! एक ही तरह! ही। इस पार.. से, उस... पार.. तल्लक! सब..., एक... हैं, एक.. ही... हैं! आज.. के, बदले हुए इस.., युद्ध के हालात.. में। इन्हें देखकर! महसूस कर! मुझको! लगा... सच...., सब..., एक जैसे... पस्त रे। अन्यथा.., थी... फिक्र... किसको....? कोई...? पड़ोसी की.. खबर ले..! सब उड़ रहे थे, पंख पर, अपने ही अपने.. नाम... का, एक पंख... ले मुफ्त की उस सुरक्षा में, मस्त.. नाटो...... नाम की छाया तले, प्रिय, गगन.. में। गिर पड़े हैं, आज देखो! शिखर से, अं...