स्मृतियाँ
मित्रों, उम्र हर क्षण शेष होती है, और स्मृति में अशेष रह जाती है। और एक दिन अंत में स्मृतिशेष हो लोगों में चली जाती है। जीवन पट का एक टुकड़ा आपके लिए प्रस्तुत करता हूं, आपको अच्छा लगे बस और क्या। उम्र की माला में, इस.. फूल से, कुछ वर्ष हैं किशोर वय के, धूसरित होते नहीं, आज भी, ताजे हरे हैं। महकते.. हैं स्मृति में, स्निग्ध वैसे, आज भी रखे.. हुए समय की भी मार से कुम्हलते.. बिल्कुल नहीं हैं। तरंगित मन, कैसा चंचल, सुकुमार था, तब! निष्पाप कह सकता हूँ, मैं.. अब, भावना में लिपट कर, यह मधुमयी! गोते लगाया, डूब कर तब। कल्पना की धार में तैरता हो मत्स्य, कोई, तरलता में सहज होकर अहा कैसा, सरित में यह तैरता था सोचता हूँ आज प्रिय, क्या मैं यही था? चित्र अद्भुत! उस समय का अभी भी है उभरता निकलता हो चांद काले बादलों से, धीमे धीमे पूर्णिमा का, बड़ा होता.. और मैं बैठा धरा पर, देखता हूँ समय की बहती नदी के किनारों पर चुप शांत...