मैं मुस्कुराहट! तेरी हूं, तेरी खुशी हूँ:
मित्रों पढ़ें और आनंद लें। खीझ कर हालात से, अलग होकर आप से, एक दिन जब शाम को बैठा अलग हो जिंदगी की दौड़ से, और पूछ बैठा, उसी से क्या चाहती है, अब बता तूं! आखिर मेरी इस जान से..? वह चुप रही, कुछ भी न बोली देर तक, एकटक! मुझे देखती चटकती कोई कली हो, चटक कर मुस्कुरा कर बोल दी, मैं मुस्कुराहट! तेरी हूं, तेरी खुशी हूँ। हर शख्श में, मैं गूंजती हूँ, सोच न! मैं न रहूं! तो क्या हो तुम! क्यूं परेशां है, क्या थक गया है? मुझसे तूं? तो बोल न! आज़ाद कर दूं अभी इस क्षण क्या तुझे.. जंजाल से..? आघात से, इन नश्तरों से कष्ट के..! मैं हिल गया, अरे नहीं री.. ऐसा नहीं, अभी काम है, सामान है, घर मेरा है मेरी प्रेयसी है कुछ पुराना है ठिकाने उसे लगाना है, बच्चे हैं मेरे.. छोटे छोटे अच्छी है तूं.. अच्छी है तूं! फिर खीझ कर हालात से, अलग होकर आप से, एक दिन जब शा...