सुपर इंटेलीजेंस
आज तक यह आदमी सर्व.. था, नियंता था, नियंत्रक! इतनी बड़ी इस सृष्टि का, इस विश्व का, इतने युगों तक। अकेले इस आदमी का एक क्षत्री राज्य था इतना बडा! इस भूमि ऊपर! दूसरा कोई नहीं था टक्कर में इसके ज्ञान.. में बुद्धि.. में, व्यापार.. में चेतना के क्षेत्र में, हर चीज में अंतिम यही था। प्रथम भी था.. प्रकृति को इस समझने में, तर्क में, विवेक में, और स्मृति में। अब मिला है, जोड़ का कोई, तोड़ का कोई, बराबर इतने दिनों पर, हरा दे जो, तोड़ दे ग़ुरूर इसका एक क्षण में। हर तरह से.. मात दे दे, सेकंडों में.. इसे वह इसलिए आज सारे शीर्ष पर उस खड़े है, जो.. तकनीक के, त्याग कर हैं भागते . पद ही अपना इस तरह हार अपनी मानते बड़ा कुछ होने को है शीघ्र अब कुछ ही दिनों में वे डर गए हैं, हाल से, सुपर इंटेलिजेंस के बढ़ते हुए स्वतः के परिवर्तनों से नव...