उसकी, ये जिद है,
मित्रों, कुछ क्षणिकाएं आपके आनंदार्थ प्रस्तुत हैं, आप पढ़ें आनंद लें। उसकी, ये जिद है, रुस्तम, वो, ही... बने, मीनार..-ए-ऊंचाई.., वह.. ही..., चढ़ें, साथ जिद... ये भी, जमीं...., छूटे... नहीं, साथ.., रखे। वो चाहता है, उसके, पास... नीचे... उतर.. आए, उतनी.... ऊंची! बुर्ज ए मीनार..! सजी, सजाई.. आफ़ताबी! जर्रा बन के। पैरों के नीचे, छूए.. तलवे उसके और वो, नीचे जमी पर, ही... रहे। वो, दरिया.. बेशक हो, पर, समंदर! पे, राज.. करे। अहंकार! नकार है, सांसों में, अटक जाता है, 'नियति का नियंत्रण सबपर है, प्रभुत्व.. उसका है' उठती.. लहरों से, और उससे, ये बात, कौन.., नीचे खड़ा हो, ऊपर.. कैसे.. कहे? महत्वाकांक्षा, अच्छी है गति.. देती है, पर, निगल लेती है जीवन के, प्यार भरे, क्षण...! वो समझता ही नहीं रात दिन एक किए रहता है... जीवन का श्रृंग, शिखर! पहाड़... का छोटा होता है, आधार स...