एक यात्रा।
जीवन यात्रा पर कुछ शब्द हैं, आप पढ़ें और आनंद लें। फावड़े चलते नहीं अब, क्या करूं! शब्द थे कुछ, कुछ भाव थे, मानस में मेरे, गूंजते जिन्दगी के सार थे वस्त्र उनके ही मैं बैठा शांति से अब घर में अपने काढ़ता हूँ, सजाता हूँ, सिल रहा हूँ। रंग सुंदर चढ़ाता हूँ प्रिय लगें, तैयार कर उन्हें, हर तरह पंक्तियों में पिरोता हूँ भेजता हूँ, नित्य सबको, मुफ़्त में, फावड़े चलते नहीं अब, क्या करूं! शक्ति का भी ग्राफ था, लहर जैसा, शुरू में उठता हुआ, बढ़ता रहा कुछ दिनों को, था रुका.. शिखर पर, फिर ढलता गया, घटता हुआ क्षीण होता, उत्तल से अब अवतल हुआ। इसलिए, फावड़े चलते नहीं अब, क्या करूं! संसार गति है, गति विषय है, विषय विष है, विष मृत्यु.. है, और तुमसे क्या कहूं! मृत्यु में ही नवलता है, जन्म है जन्म ही संसार है, यह और क्या है? मुक्ति बौरा मांगता है, जानता ही नहीं वह, बंधन को पकड़े, खुद खड़ा है.. स्वांस में हर मुक्त होता, छोड़ता जग, जिन्दगी वह स्वांस भर भर...