दस्तावेज़
सभी मित्रों को आज देश के स्वतंत्रता दिवस की बधाई। अस्सी-ववां स्वतंत्रता यह दिवस है, छोटे, बड़े, बच्चे च बूढ़े और पूरा देश, अपना प्राणियों संग, सभी खुश हैं हृदय से। उल्लसित, प्रफुल्लित और मगन हैं, देखा है मैने, अच्छा लगा, इन्हीं में हम भी तो.. आखिर, एक हैं। इसलिए, बस पूछता हूँ, आज अमृत काल में, हम कहां हैं? कितना है अंतर! बढ़ गया है, सफेदी में.. कपड़ों में मेरे, और उनके वस्त्र में। बैठे हैं जो जीतकर चुनाव, ऊंची मीनार वाली मकरध्वज के द्वार वाली संसदों में , सांसदों के, विधायकों के, विपक्षियों के, पक्षियों के धवल, उजले पंख में...। सेवक हैं वो? जीवन दिए? उठाए हैं कष्ट कोई! सत्य कह, एक भी तेरे लिए, मेरे लिए ? व्यवस्था, अधिकार, सुविधा, पास रखें, राज, हम तुम पर करें साथ रखें, सेठ को और चूस लें, अमृत सभी से, मेहनतों का कर लगा कर, प्राकृतिक दोहन करें और क्या है खेल पूरा हो रहा इतने द...