यह युद्ध क्यों है,
मित्रों, आज के परिस्थितियों पर कुछ लाइने आपको भेंट करता हूं। आपमें यह आनंद भरें यह मां सरस्वती से याचना है। यह युद्ध क्यों है, सोचता हूँ? कोई.. बता दो? मैं..! पूछता हूं? कुछ.. भी.. हो! संतुलित..! एक.. युग्म! बनना.. चाहिए, हम मानवों के, जीवनों.. में, 'समझ...' का, 'आंतरिक' और 'बाह्य..' में, समन्वय सा । गठजोड़ इनका आज.. यह, बिल्कुल नहीं है, सांसारिक.... बस्तुएं, यह...! कुछ, नहीं... हैं। विश्वास... होना... चाहिए, पदार्थ... ही, अंतिम... नहीं है। महा.. भीषण! युद्ध था, एक.. बहुत, पहले, कामधेनु के, लिए, नंदिनी.. कह! गाय.. कह! जो... कुछ! भी.. कह! साधन.. थीं, वह..! सुख ...! मात्र बस ! युद्ध तो, सुख के लिए था, बीच विश्वामित्र रूपी.. शक्ति से और आंतरिक च वाह्य के उस समन्वय प्रतिरूप मुनिश्रेष्ठ श्री.. वशिष्ठ में। दो शक्तियों, के बीच में.. यह.. यु...