मार्ग कोई! सनातन.. को दिखाओ,
मित्रों, अब तो इस सनातन के सम्मान हेतु देवताओं का आवाहन ही करना होगा। अग्नि जो न्याय और सत्व के प्रतीक हैं उनसे प्रार्थना है कि अपना स्वरूप लें और देव, ऋषि, संत वाणी को सत्य करें।
इस 'दीप' अंदर कौन है...?
पूछता हूँ, देव!
क्या तूं,
पूछता हूँ, देव!
क्या तूं,
सत्य!
है..?
तुम हो, कहां?
तुम्हें.. खोजता... हूं?
सुना था,
कोई, देव.. अद्भुत!
अग्नि! थे.., जाग्रत यहां,
इस प्रार्थना के दीप में,
हमे आदि से वह,
सुखी करते।
दीप के, इस मर्म.. में,
वह.. अवस्थित थे!
'सोम' के
उस,
'गान' से, वह प्रफुल्लित! थे
राध*.. देते, रयि*..
लाद* देते,
सुपथ
पथ..
हमे.. दिखाते थे,..
देव को उन खोजता हूँ!
वह हैं.. कहां..?
समाहित!
हो,
दीप... में तुम! जानता हूं!
चाहता हूँ..!
निकल! आओ..;
आवरण से पार आओ..,
अब, सच! यही मै चाहता हूँ।
अंधेरे..कैसे? घने... हैं,
आदमी के हृदय में,
जरा... यहां
देखो..?
लड़ रहे, वध कर रहे,
लड़ रहे, वध कर रहे,
कैसी चोरी कर रहे
ये चढ़ावों की
ध्वंस जग का कर रहे..
ध्वंस जग का कर रहे..
इसलिए...
आवाहन! तुम्हारा.. कर रहा हूँ...!
आवाहन! तुम्हारा.. कर रहा हूँ...!
समाहित! हो, दीप में
तुम!
चाहता हूँ..!
निकल! आओ..।
देव!
दीपक.. छोड़ दो..
बाहर निकल मेरी बात सुन! लो।
बाहर निकल मेरी बात सुन! लो।
विपद! इससे बड़ी होगी
और क्या...?
दान की चोरी! सुनी है
तूने.. क्या?
चोर! कोई.. बाहरी
होता अगर तो
फिर भी
सुख..
था,
यह क्या हुआ?
दीप का, तेरे स्नेह ही.. चोरी गया।
तुम जल रहे हो, स्नेह बिन..
संज्ञान लो, हे देव!
अग्निन!
जला दो, रावण की लंका!
इस 'दीप' अंदर कौन है...?
पूछता हूँ, देव!
क्या... तूं,
सत्य!
है..?
हो,
अगर तो
हो कहां? तुम्हे.. खोजता हूं?
सुना है, कोई देव अद्भुत!
अग्नि! हैं. जाग्रत यहां,
इस प्रार्थना के
दीप में,
हमे
आदि से, वह सुखी करते, आ रहे हैं।
अब तो, हृदय में एक दीप रख लो,
स्नेह की बाती बनाओ,
पाप को इस
मिटाओ,
और
खुद जलो,
अनृतों की गाँठ!
अनृतों की गाँठ!
पल में जला दो...।
सुपथा दिखा दो, हाथ मेरा थाम लो,
हे...! व्रतपते...!
हे...! व्रतपते...!
अग्नि! हे..!
मार्ग कोई! सनातन.. को दिखाओ,
इसे बचा लो.., इसे बचा... लो।
सुना था, कोई देव अद्भुत!
अग्नि! था..
जाग्रत यहां,
इस प्रार्थना के दीप में,
हमे / आदि से, वह सुखी करता।
जय प्रकाश मिश्र
राध*.. देता, रयि*.. लाद* देता अतः हमे योग्य बनाता था हर ऐश्वर्य और सत्य आदि सत्व, धनधान्य से पूर्ण करता था।
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