एक पक्षी.. उड़... रहा.. आकाश.. में,
एक पक्षी..
उड़... रहा.. आकाश.. में,
बहुत.. ऊंचे..,
पर, कहां.. था, विचारों.. में,
भूमि.. पर, वह?
उड़... रहा.. आकाश.. में,
बहुत.. ऊंचे..,
पर, कहां.. था, विचारों.. में,
भूमि.. पर, वह?
आकाश में या और आगे?
बताना,
स्थान.. क्या है?
आधार क्या है, पंख.. का उन,
उड़.. रहे जो, उतने.. ऊंचे!
उड़.. सकेगा
कितना आगे, और आगे..
फिर भी कब तक,
कहां तक!
लौटना होगा उसे
बताना,
स्थान.. क्या है?
आधार क्या है, पंख.. का उन,
उड़.. रहे जो, उतने.. ऊंचे!
उड़.. सकेगा
कितना आगे, और आगे..
फिर भी कब तक,
कहां तक!
लौटना होगा उसे
यथार्थ की
इस खुरदरी मनुभूमि ऊपर।
इस लिए
यथार्थ ही वह सत्य है
जो, जोहता है बाट सबकी,
सदा... नीचे,
बाहें पसारे! मित्र कबसे!
'विचार... केवल
इस खुरदरी मनुभूमि ऊपर।
इस लिए
यथार्थ ही वह सत्य है
जो, जोहता है बाट सबकी,
सदा... नीचे,
बाहें पसारे! मित्र कबसे!
'विचार... केवल
कल्पना
है'
यथार्थ... की..
आधी अधूरी ही नहीं,
बस अंश में, बहुत थोड़ी, जहां तक..
प्रकाश था, पहुंच थी,
यथार्थ... की..
आधी अधूरी ही नहीं,
बस अंश में, बहुत थोड़ी, जहां तक..
प्रकाश था, पहुंच थी,
इन इंद्रियों... की।
पर..
पर..
सत्य.. वह!
इस यथार्थ... का
प्रिय उससे आगे.., उससे... आगे।
और.. कुछ है।
इस लिए मत पूछ मुझसे
कौन..
हैं.. हम..!
हम.., कह रहे हैं मित्र! तुमसे,
हम... मतलबी,
प्रिय उससे आगे.., उससे... आगे।
और.. कुछ है।
इस लिए मत पूछ मुझसे
कौन..
हैं.. हम..!
हम.., कह रहे हैं मित्र! तुमसे,
हम... मतलबी,
इस प्रकृति में,
इसकी
प्रकृति से दूर हैं।
जी रहे हम, विभ्रमों में, सत्य से अति दूर हैं।
इसकी
प्रकृति से दूर हैं।
जी रहे हम, विभ्रमों में, सत्य से अति दूर हैं।
जय प्रकाश मिश्र
विभ्रम नहीं 👇🏻
ReplyDeleteहम-सब बुलबुले हैं पानी में मिल जाना है, पानी कोई और नहीं इश्वर ही है 🙏🏻