आज! नारी दिवस है, नारी सदा मुकुलित रहे।

मित्रों, नारी में उसकी महानतम विभूति, मां के रूप में स्थित होतो है। इसमें वह इस विश्व को अपने निर्मल प्रेम और करुणा में भर सदैव, जीव-जीवन-प्रसव और वात्सल्य से संसार को कराल-काल से बचाकर, नवल एवं जीवंत रखती है। उस नारी को आज नारी-दिवस पर, अतुल्य उपकार के लिए संपूर्ण सृष्टि, प्रणाम! करती है। सभी नारियों को मै अपनी हार्दिक बधाई देता हूँ।

रूप! लेता, विश्व.. यह, 
इतना बड़ा.., 
सतत.., 
चोला, बदल.. कर, 
नव.. ही, रहेगा! 
कौन.. है? 
वह..!  
यज्ञ.. यह, 
इतना.. बड़ा! इतने बड़े..
संसार... का, पूरा... करेगा।

काल... को भी, बांध... लेगा, 
कालिका की 
चोटियों... 
में, 
इतनी काली,
आंख की निज, पुतलियों में
समा लेगा, प्रेम से
स्नेह से, 
वात्सल्य में, उसे झुला देगा,
झूलना.. 
बाहों का अपने
पुचकार दे गोदी भरेगा? 

वह! कौन.. है,
जो..
वश.. में, रखे, 
निष्ठुरे..इस काल को
मुट्ठियों में, बंद कर
इस कुलिश, 
को! 
पाल लेगा, अंक में।

जो.. ठान बैठा 
था..., मनों.. 
में, शुरू.. 
से, 
जर्जरित! 
जीवन करेगा, 
हर जीव का, 
हर वस्तुओं का
हर किसी का, 
जाने न कितने, उपक्रमों से।

वह! कौन है? 
जो लड़ रहा है, आदि से
अपावन! इस काल से! 
पिछाड़... देता, हर बार! उसको, 
बिना..,एक हिंसा किए..
बिना श्रम ही!
मात्र! 
अपने, प्रेम से,
करुणामयी, प्रिय दृष्टि से।

नारी है वो, नारी है वो..
जीव के
इस! 
प्रसव से।
जीव को, जीवन.. वो, 
दे.. के।

इस लिए, वह विजेता है 
आज भी, 
अरे!  
मां.. है वो, 
इस प्रकृति का, वरदान है।
काल को, कवलित है करती
कमलिनी यह! 
रूप देती, नवल को
संपूर्ण.. ही,
देख कैसे!  
इस जगत को, हर किसी को।

आज! नारी दिवस है,
सम्मान है, 
नारी.. का हर,
हम सभी की, तरफ से,
पुष्प सी, वह प्रफुल्लित हो! 
मन! प्रिये, 
इन नारियों का 
सदा ही, मुकुलित रहे।

जय प्रकाश मिश्र







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