सांस क्या है? आसाँ नहीं है, जानना! आई सी यू-3

सांस.. 
क्या... है? 
आसाँ... नहीं है, 
जानना..., 
इसे.., समझना.. प्रिय! 
क्रिया.. है, 
यह मानता.. हूँ, 
पर.. मात्र
उनके ही लिए,
जो... जानते, ही... हैं नहीं, 
की.. 
लंग्स* क्या है! 
कहां.. है!  
बस नाम को हैं, पास.. उनके..।

कभी... 
पूछना...?  
जा.. देखना! 
कभी... मिल के, 
कहना..., बताना...
क्षणों.. में, 
बस.. क्षणों भर के, ही.. लिए
जब.. दम घुटे! 
और... 
रास्ता.. ही हो, नहीं.. 
बच निकलने का, मित्र.. उससे! 

जानता है,
सांस का, प्रिय! सच वही...
जिसकी रुकी हो 
मात्र क्षण भर के लिए ही यह.. कभी।
इस जिंदगी में।

और तुमसे क्या कहूँ! 
जिंदगी...., 
ये.. सांस.. है
सांस.. ही है, जिंदगी।
और, यह.. भी 
सत्य है! 
मैं मानता हूं
शाम.. होती सुखद है
सबके लिए..।
मैं.. 
जानता.. हूँ, 
राजधानी.. प्रेम की, 
प्रिय! 
सजती... यहीं.. से, 
मानता हूं! 
पर क्या.. कहूँ, मैं.. क्या करूं! 
यह सत्य है, 
यह शाम... डर है, 
मित्र, प्रिय..
कुछ... के लिए! 

रात्रि यह, 
अति भयावनी...
दुर्गम्य है, उनके लिए,
सांस जिनकी, क्षीण.. है,
मैं कह रहा हूँ मात्र बस उनके लिए।

एक... भय! 
आ.. घेरता है, नसों.. में
अंधेरे.. का, 
क्या.. कमी है,
अंधेरों.. में पूछता हूँ! 
ऑक्सीजन, प्रियु! 
क्या?  घट है जाता रात्रि.. में ? 
या निशाचर कोई है? 
आ.., जो जाता रात्रि में... 
या अनर्गल है सोच मेरी मात्र यह,
बताना.. 
इस रात्रि का वह डरावना सा
सत्य.., क्या है? 

जय प्रकाश मिश्र


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