मत पूछ मुझसे, दर्द... क्या है? आई सी यू पार्ट-4

मत पूछ! मुझसे, दर्द... क्या है? 
पास.. से देखा है मैने!  
नग्न ही 
इस दर्द को, 
बहते.. हुए.. आदमी की
नसों.. में, धमनियों.. में,
छटपटाते..., 
जीव को इस, रात... भर, 
उमड़ते..! 
इस, दर्द.. को, प्रिय! 
उछलते.., 
मछलियों का नृत्य करते।

और, तुमसे क्या कहूं! 
कराह...! है, ये... 
दर्द! उठती...., 
धंस.. रही, अंदर कहीं..
इन हड्डियों में, 
टीस... देती, बिकल करती
मृत्यु का अनुरोध करती, 
निःसरित, 
स्फुरित.. प्रिय! 
सच..! दुखी मन से।

प्रार्थना का मूल, प्रिय..! यह!  
दर्द... है,
यह, उलाहना.. है प्रभू से, 
तन... छोड़ दें।
वह क्या करे, जो कष्ट में है! 
हर एक पल, भारी.. बहुत है,
दुनियां कहां..
और वह कहां, प्रिय! 
सच अलग हैं, दोनों जहां से! 

दर्द का साम्राज्य, सच प्रिय!  
बड़ा..... है
संसार के इन सुख दुखों से।
कांपता है! दर्द से जब
बिलखता है, 
आदमी यह.. रोग से, 
या व्याधि से
रोम.. मेरा, झुलसता है, 
ताप... से, 
प्रिय..! 
डूब.. जाता हूँ कहीं 
मै..., प्रार्थना में।

किस.. लिए, 
तुम.. पूछती हो? 
दर्द उसका, तन नहीं, प्रिय! 
मन समाता, सत्य मेरे! 
करुण करुणा सीजती है उर से मेरे
शांति! प्रिय..! प्रभु! शांति ही
अब इसे दे दें।
इसे दे दें। 

मत पूछ! मुझसे, दर्द... क्या है? 
पास.. से देखा है मैने!  
नग्न
ही 
इस दर्द को, 
बहते.. हुए.. आदमी की
नसों.. में, धमनियों.. में।

जय प्रकाश मिश्र


 


Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

मेरी, छोटी… सी, बेटी बड़ी हो गई.. जब वो.. पर्दे से

पेंशन बिन जिंदगी, मेरी ये खाली हो गई है।

चलो पेरिस की एक शाम से मिलें!