आज की जनरेशन
आज की जनरेशन
वो.. हर वक्त,
हर तरह, सावधान थे,
मै समझता हूं शायद, इसीलिए ...
अंदर से, ज्यादा परेशान…थे।
उन्होंने चुना था
अपने लिए, सदा..
अच्छे से अच्छा..
आधुनिकता.., उन्नत शिखर..,
अद्वितीय चम चम चमकतीं
कारें..और घर..।
।
मैं, मानता हूं
पराक्रम के बल पर,
आधुनिकतम मशीनों के
सुपरतम..
तकनीकों पर चढ़ कर,
धोखे से.. चतुराई से
अच्छों को, लोगों को,
प्रकृति को, छल कर...,
वजह बे-वजह
सामने से हटाकर…
नीचे... गिरा कर,
दूसरे, सभी के, मंसूबे,
मीनारें, महराबें... ढहाकर...।
हमेशा..
आगे बढ़ना..
शीर्ष पर.. रहना…
अधिकतम संसाधनों का
दुरुपयोग की सीमां तक उपभोग करना,
इसके लिए, तोड़, सारी रोक, टोंक ..
अंधे सा अंधाधुंध,
राक्षसी दोहन करना, आम है
इनके लिए ।
मुक्त जीवन..
चीजें! जो समयपार हों,
बे मौसम हों,
उनकी हर समय, हर जगह
भरमार हो!
इच्छानुसार भोग,
नहीं जीवन में कोई सुंदर
स्वाभाविक योग।
यही तो था उनका
आज का
सभ्य जीवन! और क्या था?
न समय से उठना,
न सोना
कभी कभी होता है,
शायद इनका, ब्रह्म मुहूर्त में
नहाना.. धोना।
अपनों से बात का समय
कहां..!
कहां है, अब इनमें..
संग.. बैठना, बात.. करना
और
आपसी.. सुख दुख में
साझेदारी ले रोना धोना।
आज की जनरेशन का
और क्या कहूं!
कैसा है, आधुनिक सभ्य
इन लोगों का
आधुनिक जीवन जीना।
जय प्रकाश मिश्र
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