कितने अलग दिखते हैं,

अपने देश के, 

हमीं से चुने नेता, 

इसी देश के ही वासिंदों, 

आम जनता और लोगों से।


उन्ही में से होते हैं, 

उन्हीं जैसे होते हैं

पहली बार जब यह लोग 

चुनाव लड़ने, खड़े होते हैं।


पांव लागी से लेकर

सलाम करने तक 

कैसे आपके दिल में 

दबे पाव भीतर, उतर लेते हैं।


चुनाव जीतते ही 

वह कौन सी 

संजीवनी दवा होती होगी,

यार! सब नेता मिल बैठ 

साथ साथ पीते हैं। 

असर जिसका

इनपे ही नहीं, इनके

कुनबे पे भी चढ़ जाता है,

सबके मुंह लाल, 

चाल टेढ़ी पकड़ लेते हैं।


मैं सोचता था, 

शायद निश्चिंतता

रंग लाती हो इतना, पर

यह बात तो, 

पांच साल 

ताजिंदगी के लिए 

लोगों से अलग 

अतिविशिष्ट हो लेते हैं।


ऐसे तो कोई भी

किसी से कम नहीं देखा! 

अपने देश के नेता हों, 

अफसर हों, सरकारी मातहत हों!  

समझ नहीं आता, क्या 

कोई जानी दुश्मनी है? 

यहां के धंधेबाज, 

जिम्मेदार लोगों की 

इन बेचारे आम लोगों से।

कुछ ऐसे ही 

ये सभी पेश आते हैं यह सब

“आम निरीह” लोगों से।


इनकी गाडियां, 

इनके कपड़े, 

इनके चेहरों की रंगत, 

कुछ भी नहीं मेल खाता

इनके देश वासियों के आम

“मूल बासिंदों” से।


फिर भी उनके लिए तो

उन्होंने 

देस वासियों की सेवा में

खपा दी 

जिंदगी अपनी,

बेशक, 

लोगों की दशा, दिशा,

हालात और दुर्दशा 

कुछ भी नहीं बदली।

इन सबकी जिम्मेदारी और

चालाकी भरी दलीलों से।


इतना सब होने के बावजूद 

शर्म नदारद है 

इन सभी चेहरों से,

सच कहें, 

इस देश के नेता, 

अभिनेता, नौकरशाह

को क्या लेना देना 

यहां के लोगों से।


अपनी पार्टी, 

अपना पद, अपने लोगों

तक सिमट गई इनकी सोच,

आज क्या उगाहा! 

कल क्या उगाहूं! 

कैसे बचाऊं कद, 

पद, निरापद! 

यहीं से शुरू!  

यहीं पे खत्म!  

किसी की नौकरी, 

और किसी की पांच वर्षीय हद।

जय प्रकाश मिश्र

भाव: पार्टी सक्रिय कार्यकर्ता के लिए ही नहीं कुछ कर पा रही है। आम जनता कहां होगी सोचिए। सारा कुछ ये अपने कुर्सी के लिए ही करते हैं। ये लोग जनता को स्नेह का पात्र नहीं कुर्सी पाने का औंजार समझते है। जनता सीढ़ी है ऊपर जाने की, जो पांव पड़ने के बाद इनको कभी नजर भी नहीं आती। खेद है हम एक ऐसे दुनियां में रहते हैं जहां हमारे बिश्वास को ठेस लगती रहीं है। अब तो हमारे बड़े बड़े नेता बिके हुए लगते है, बिकी मानसिकता, बिका ईमान, बिकी अंतरात्मा, के लोग ही सिस्टम को हाईजैक कर लिए। सबकुछ, क्या है सब छिछला है, जीवन में गहराई का पुट गायब है।  




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