खुशियों की होली आई है।

सभी को हैप्पी होली।

कोपलें.. धानी हुई हैं,

गे..रुआ रंग छोड़ कर,

कैरियां आमों में आईं  (बौर गए आम के पेड़..)

बंध.. सारे.. तोड़कर। 


टो..ह ले..ते, 

जो..हते, जैसे, 

कोई हो आ रहा,

ठीक वैसे डालियों में  

रस नया है, 

छा रहा।


फुनगियां,

फागुन में, 

फाड़े, डालतीं हैं 

डाल को,

किंनखियों से 

शाख में

कलियां खिलीं 

गुलाब के।


बिछ रही चादर रंगीली

धरा पर हर ओर सुंदर,

फागुनी ही बह रही है..

आज सबके हृदय अंदर।


हुलसे हुए हैं उर सभी के

कै..सी.. ये रंगत..आई है,

लग रहा है आज.. ऐसा 

खुशियों की होली आई है।


आओ मिलें, गुलदस्ता बनें

महक जाए… फिज़ा सारी,

रंग. कुछ ऐसा.. चुने हम..

सभी पाएं… प्रेम… पाली। (प्रेम के अवसर)

                  जय प्रकाश





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