दुनियां कहां है जा रही और क्या? कर रहे, हम!
माहौल क्या है, आज.. का?
हैं.. कहां पर, खड़े हम?
दुनियां.. कहां है
जा.. रही..
और
क्या...?
कर रहे, हम!
प्रश्न..
तो, यह..!
उठेगा... ही!
वाजिब.. भी है,
जरूरत.. है,
सच
कह रहा हूँ!
समझिए
ना..
आ रहे, इस.. समय की,
कुंजी है यह।
देख न!
क्या हो रहा है,
विश्व में...
किस.. तरह, कुछ.. विदेशी,
शक्तियां,
आक्षेप दे! दे!
कुछ... ही, दिनो... में
वेनेजुएला राष्ट्रपति
को, ले
गईं...
जबरदस्ती...
साथ.... अपने,
दोषी... बता कर!
उस राष्ट्रपति... को तस्करी में!
इतना ही क्यों
दहशत..! फैलाया
देश... अपने, घुमाया..
पार कर, हद.. दुष्टता की,
सड़क पर, हाथ बांधे, खुले में...!
सोचिए... न!
क्या.. है
ये...।
मैं...
पूछता.. हूँ?
आपसे से, नम्रता से
देश तो, तस्कर! नहीं.. था!
देश.. था,
स्वाभिमानी.. लोग होंगे
हम सभी से,
वहां.. भी तो!
क्या हुआ! सब ढह गए!
इस..
एक क्षण में!
विदेशी साजिश! के आगे,
धनाढ्य तो हर देश में स्वार्थी हैं
सुविधाओं के
आगे,
गिरे हैं, सम्मान से,
व्यवसाई अधिकतर, ऐसे हो होंगे
पर लोग क्या सब खाद! थे
अंकुर! नहीं क्या
एक भी थे!
सभी
थे
कीड़े.. मकोड़े,
आवाज चुप है, लोग चुप हैं
मात्र! एक.. साजिश... के आगे!
झुक गए सब!
राष्ट्र का
उस नाम क्या,
बस... हवा में था,
संप्रभू! एक राष्ट्र वह
कैसे बना था,
क्या...?
राष्ट्रधर्मी नागरिक कोई! नहीं था?
राष्ट्र प्रेमी क्या वहां पर एक
न.. था, क्या है यह
प्रश्न है? यह...
देश पूरा
इस तरह गुमसुम
सा क्यों है?
इसलिए तो कह रहा हूँ
माहौल क्या है, आज.. का?
हैं.. कहां पर, खड़े हम?
दुनियां.. कहां है
जा.. रही..
और
क्या...?
कर.., रहे, हम!
बात!
इतनी सी नहीं है,
बात अपनी भी है, मित्रों!
एक प्रश्न.. था, इस ही, तरह का
बहुत पहले, गुलाम थे हम!
दस्युदल.., यूनाइटेड
उस! किंगडम के।
इस लिए,
उस समय, राष्ट्रपति ना
राष्ट्रपितु.. श्री
गांधी ने,
शिकायत की.. बहुत पहले!
विद्वान टालस्टॉय से:
अंग्रेज हैं ये, बहुत गंदे,
क्रूर हैं, दुष्ट भी हैं,
आतताई सबसे बड़े।
अधिकार हम पर
कर लिए,
गुलाम हम सब रह रहे,
दीनता में
बताइए हम क्या करें?
कुछ हेल्प मेरी कीजिए!
"विद्वान" टालस्टॉय था,
उसने ये पूछा
लेटर
में,
बस ये बताओ?
कितने हो तुम, सब लोग सारे!
और कितने, लड़ मरे!
अंग्रेज से...,?
कोई नहीं,
लड़ मरा था,
इस देश में,
अंग्रेज शासक जब बने।
टॉलस्टाय बोला
तुम सभी,
देश.. न! हो,
कबीला! हो,
हिन्दुओं.. के।
जातियों के, मात्र वो भी,
साथ अपने, स्वार्थ में..।
इस लिए मैं कह रहा हूँ
पूछ अपने
हृदय से, क्या देश हो तुम!
लड़ोगे, लड़ मरोगे,
जरूरत पर
देश पर,
इसी भारत भूमि पर
खड़े... खड़े...।
क्या छोड़ दोगे
गिले शिकवे आपसी...
एक होकर,
सब चिपट लोगे
दुश्मनों को, चींटियों से
बिना सोचे, बिना समझे,
एक संग,
बचाने इस देश को।
तो समय कम है,
रूप रेखा बनाओ
एक जुट समय पर
तुम रह सको।
इसलिए मैं कह रहा हूँ
माहौल क्या है, आज.. का?
हैं.. कहां पर, खड़े हम?
दुनियां.. कहां है
जा.. रही..
और
क्या...?
कर.., रहे, हम!
जय प्रकाश मिश्र
Comments
Post a Comment