एक खुशबू है गजल!
आप सभी मित्रों को पुण्य गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। आज इस अवसर पर अपनी पहली गजल आप को हस्तगत करता हूं,आप आनंद लें।
तो.. मित्रों, लीजिए...
पेशे.., खिदमत...
है..,
मेरी 'पहली गजल'
चाहता.. हूं!
आप, पढ़ें...,
या
न... पढ़ें,
देखें.. इसे..,
कम... से, कम..!
नख-शिख..., नख..!
शब्दशः आखिर तक।
चुलबुलाहट' है,
गजल!
मासूम! के,
मासूम! मन की,
निकलना.. तो चाहती है,
मासूमियत से
लंबी.. इस।
पर,
पहरे.. हैं,
तेरी सोच... के,
सोच..! तो
अरे! कैसे, कैसे?
ऐ, समाज..! इसपर...!
हावी है,
तूं...
पता है
हम, सभी को
यह.. ठीक से।
दाग!
ना.. ना..
दाग, इसके,
आंचलों पर एक हो
ऐसा नहीं! ऐसा नहीं!
निदाग है
यह ,
समस्या तो हमारी है
आज तक
उम्र.. इसकी, क्या.. रखें...
किसी.. को, मालूम ना.. है.. !
क्या कहा?
फ़र्च हो!
तो, बताओ न!
सब.. एक होकर
इस गजल! की,
उम्र..
जो है, छलकती
क्या रखें? अभी ।
तकल्लुफ! बिल्कुल
न कर!
तूं!
उसके लिए,
रास्ता...,
वह,
जानती है,
हवा, है इसकी सखी!
बचपन की... प्यारे
अंदर से..., तुम्हें, पहचानती है।
उम्र बेशक कम हो, इसकी
कमसिन.. हो, बिल्कुल
देखने में,
पर 'गजल है'
ये..
'कमबख्त लोगों की
महक'
अच्छी तरह, पहचानती है।
सोच तो,
चुलबुलाहट! है, गजल
मात्र न!
मासूम! मन की।
एक खुशबू है गजल!
अधःखिल,
खिलने
को
आतुर,
कलियों..! के मन की..।
फूलों.. की नहीं!
मसकती.., महकती
पोरों... से,
छन! छन!
खुशबू, अरी यह फैलती...!
चुपचाप!
चंदन लाल सी...
एक, चुलबुलाहट है!
गजल! तुमको लगा...
मासूम! मन की।
गजल भी, क्या चीज है,
उम्र है, शब्दों की मेरे,
वाक्य में,
एक,
सोलह से आगे, आजतक!
बढ़ती नहीं,
अटकी, पड़ी है, किशोरी हो,
निगोडी,
स्वर्ग की कोई अप्सरा हो
वयसंधि को
जो लपेटे अंग अंग खड़ी।
कितने हुए दिन, साथ इसके
आजतक,
फूल हो कोई, खयालों का,
स्मृति का, ताजा हल्का
बहका.. बहका...
महक जाता
खिड़कियों से लुभाता
कुछ इस तरह की चुलबुलाहट
है गजल मस्ती भरी।
धूप हो,
शिशिर की,
ताजी खिली, गुनगुनी
सी,
नर्म, थोड़ी चटपटी....
चांद हो, गिरता...!
ऊपर...वहां,
आकाश! से नीचे.. यहां इन बगीची में
धीमे धीमे,
कुछ इस तरह की है गजल
स्पर्श देती, मधुर मन की।
एक सरिता,
पहाड़ी कोइ, उतर कर
उत्सृंग से,
चुप! शांत! बैठी
गोद में,
कठिन उस पाषाण.. के,
निर्झरी हो, शीतली
चांदनी, धवलिमा सी रात में
कुछ इस तरह ही है गजल
अक्षरों... में शब्दशः।
और ज्यादा सच कहूं तो
गजल मेरी
सयानी बच्ची है कोई!
चौबीस कैरेट, गोल्ड है,
वयसंधि की धारों पे बहती।
जय प्रकाश मिश्र
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