अर्धसत्य के भीतर क्या है

अर्धसत्य के भीतर क्या है

October 09, 2025


खोज रहा था, प्रिये! "सत्य" मैं..

राह.., कठिन थी...

कैसे.. कह 

दूं! 

अंतर्मन.. 

बातें.. करता था, 

बोला मुझसे, हार.. गया तूं!   


क्रमिक.. 

राह.. है, चलता चल.. प्रिय, 

इष्ट मिलेगा, निश्चित.. हो... तूं! 

एक किरिच भीतर से बोली, 

समय कहां है? सत्य.. खोज तूं! 


मैं, तो एक इल्यूजन.. ही था

अर्धसत्य... कह..! 

जान.. रहा 

था, 

मुक्त सत्य मैं, कैसे.. जानूं..

उलझ.. गया हूँ, 

मुक्त.. 

कहां... हूँ! 

जीवन.. को, गिरते.. 

सरिता.. में,

बहते, उसकी मौज, धार में

आंखों.. अपनी, देख.. रहा हूँ! 


रोक रहा था, 

मैं सरिता.. को, पहले ऐसा 

मुझे... लगा था, 

जीवन.. खुद ही, बहता.. है, प्रिय,

नियति नटी संग, धारा.. में, मिल

अर्ध सत्य, से दूर हुआ.. प्रिय! 

पूर्ण सत्य, पहचान.. गया मैं। 

जय प्रकाश मिश्र


 



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