मिलन के, अंतिम क्षणों में।
दिन...,
चुक.. चुके... थे,
यार... के,
अब तो, वह..
पेरोल... पर.. था।
समय.. था,
उस, समय.. उसका
नीचा.. किए, सिर.., जग.. खड़ा था।
कोर्टियस,
नखरा.. था, उसका,
शख्स.. था,
वो..
उस, तरह.. का
दबा.. देता, हवाओ.. को,
उठती... हुई, प्रिय! आंधियो को..
गिरा... लेता, मुकुट.., माथा,
चरणों.. पे निज!
जो जल रहे थे, अंगारे थे,
आग... थे।
जोहते थे,
लोग,
वह कुछ बोल दे.., बस, यार.. मेरा..
मुख... वही, अब,
महीनों... से, बंद... था,
नाक.. की, पतली नली... पर
वह, टिका,
जाने न, कब.. से!
दिन.. नहीं, मुझे... जोहता...
डोर थाँभे, सांस... की, बिस्तर पड़ा था।
क्या, बचा..! अवशेष.. था!
या... रहा होगा!
खुद
समझ.. लें,
बस.... एक झिल्ली,
फैली... पड़ी, पिचकी, हुई,
कोई... फर्श पर हो, चर्म... की,
हड्डी... भरी, प्रिय..!
बहुत.. पतली,
वह! और क्या... था।
दूर... था,
हर भिज्ञता... से,
देखता जग, आंख से, आत्मलय.... था।
डिमेंशिया से लड़ रहा वह, वीर था।
मिलना... था,
मुझको...
आखिरी ही, बार शायद...
उम्र... का, संदेश...यह,
पिछले.... दिनों
मुझे.. मिल... चुका था।
क्या कहूं! कैसे कहूँ!
मैं जानता था...
निश्चय नहीं, अब घड़ी भर क्या!
बस, पलों तक... ही शेष था।
आंखे खुली थीं, होठ सूखे, पैर पतले,
सिलवटें... हों,
बिस्तरों... पर, मात्र जैसे!
वह पड़ा...
हिलता.., अचानक,
हवा की सिहरन हो जैसे।
एक दीपक जल रहा हो
शांति में,
उम्र के अंतिम! प्रहर में,
स्नेह के, सद्भाव से,
प्रिय! दूर होता...
यार मेरा, लग.. रहा था।
दुनियां भी क्या है!
देखता हूं... सोचता हूँ..
धुंध.. है, यह!
भ्रमों.. की, किशोरों.. की उम्र में,
आंधी प्रिये! दायित्व की..
जवानी... में
फुर्सत.. नहीं, इसमें.. कभी!
कल... के, पीछे..
भागती,
आज को फीका किए, यह दौड़ती है।
लेटा.. हुआ,
औंधा... पड़ा, एक पेड़ हो
वह, बुढ़ौती में, अचल प्रिय!
आ बैठते हों, यायावरी पक्षी.. कभी
चुप विचारों के
संबंधियों के रूप में जिस
उस तरह, वह अब जी रहा था।
इस जिंदगी... की, दौड़.. में
आराम कब था?
उम्र के इस मोड... पर
इस देह में, अब दम कहां था?
चुक.. चुका... था,
यार... मेरा,
अब तो, वह.., पेरोल... पर.. था।
सौंदर्य... क्या, अभिमान.. क्या
कुछ.. भी नहीं, अब,
समय के प्रिय! पुष्प थे, सब!
खिल.. चुके, महकते चुक..
झर... चुके! सब!
अब उम्र के इस संधि में
जिंदगी से दूर हैं, सब..!
बंदिशें परिवार की,
दायित्व कोई!
छूटी कहीं हो, प्रिय हे हमसे!
माफ... करना,
हाथ जोड़े कह रहा है,
वह मित्र मेरा!
मिलन के, अंतिम क्षणों में।
विदा पहले, अंतिम मिलन में।
जय प्रकाश मिश्र
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