राधा ने चुनरी ओढ लई! सखि आज गुलाबी री।
मित्रों! राधा.. निश्चय ही, नैसर्गिक आनंद, की अनुभूति हैं, और जब वह स्वयं प्रसन्न हो जॉय तो क्या कहने, वर्षा आनंद की और इसी में आज आप भी भीगें।
अरी....!
रंग, ओढ़ि... लई...!
हां.. हां.., ओढ.. लई,
राधा... ने,
चुनरी...,
आज.., गुलाबी री!
पितांबर... पर!
अरे...! पितांबर पर...
झलक...! पड़ी,
सखि,
आज..., गुला...ली जी!
राधा.. ने,
चुनरी.., ओढ़ि लई....
सखि, आज.. गुलाबी री! ।
सांवर! कान्हा...
अरे! सांवर! कान्हा...
हां.. रे! सांवर... कान्हा,
चिहुंकि..! पर् यौ...,
छवि..! देखि...
दुलारी...
की..,
छवि... देखि, दुलारी.. की...,
राधा... ने, चुनरी....
राधा ने, चुनरी.... ओढ़ि लई..
सखि...
आज, गुलाबी... री!
हरसैंय.... गैया..., उछरैंय... बछरू,
उछरैंय... बछरू,
लहरय, यमुना...!
ठाट..., नवाबी... री !
राधा ने, चुनरी....
ओढ़ि लई..
सखि...
आज, गुलाबी... री!
वन... फूलंय! प्रिय..
झूमंय..
कैसे...
अरे! झूमंय.. कैइसे...
हिलत.. कुंडल..., सुं..दरि.. के जैईसे!
राधा.. मन, डोलय.. री, ऐसे!
कान्हा के मन की खातिर
सखि...
राधा ने, चुनरी.... ओढ़ि लई.. प्रिय!
आज, गुलाबी... री!
बांसुरि.. मन,
कुछ..,
क्लेश.. पर्यो.. है!
देखि, अधर..!. प्यारी.... की...
अमृत..! टपकत
बूंद.. बूंद..
प्रिय..
अधरन... राधे...
सूखे.. होठ, मोहन.. की...
राधा ने, चुनरी.... ओढ लई..
सखि...
आज, गुलाबी... री!
पवन बहय, अस.., सुमन, झकोरा...
माधवि... रस, भीगी सी..
ग्वाल बाल सब, नृत्य.. करत हैं,
सुधि नहिं, वसनन.. की,
सखि राधा ने, चुनरी.... ओढ़ि लई..
रंग... आज, गुलाबी... री!
जय प्रकाश मिश्र
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