प्रभु राम ने, वह..! क्या किया ? खुशियां मनी, दीपक जले...

संदेशे... कितने,  मिले 
शुभकामना, कितनी... मिलीं
अंबार.. थी! 
बस.., एक दिन! 
दीपावली, दीपोत्सव त्यौहार 
बस, प्रिय.. पड़ा 
जिस दिन! 

राम को, आए हुए, 
अभी..., 
हुए... हैं, बस.., एक.. दिन...!
अयोध्या, जो विकल... कल थी 
बीतते... विभावरी! 
क्या... हुआ, शांत इतनी! 
क्यूं हुई? 
शांत... सब,
एक..!  चिंगारी नहीं! 

ज्वार.. वह, भाटा..है यह, 
कितना गजब! क्या है यह! 
कहां है, बाजार वह! 
रात भर, 
जो जगमगाया, 
उथलो.., पुथल.. बरपी हुई
सारी... उछल!  
बस.. एक दिन... की ! 

सो.. रहे सब! 
बेसबब! 
क्या अंधेरे हैं, हट.. गए अब, 
उजाले, कायम.. 
रहेंगे.,..
बादल कोई थे, छंट गए अब।
सारी कवायद एक दिन! 

प्रभुराम को, आए हुए, 
हुए... हैं, अभि.., कितने दिन! 
कितने संदेशे, शुभकामनाएं,
अंबार.. सी,
मुझको.. मिलीं, 
बस.., उसी.. दिन! 
दीपावली, दीपोत्सव था.. प्रिये, जिस.. दिन! 

सोचना था, बैठ कर...
प्रभु राम ने, 
वह..!  
क्या किया ? 
खुशियां मनी, दीपक जले...
आम जन था, प्रफुल्लित..! 

रावन का बध! क्या..? 
पितु बचन पालन? 
लंकादहन...?
अरि सकल मर्दन.., हनुमत मिलन, 
भूमि पुत्री जानकी की 
सकुशल थी, 
वापसी! 

जी... 
नहीं, 
वह योग्य राजा 
की प्रिये! थी.. पावती...।
जो... राज्य का, भूखा नहीं था,
प्रजा रंजक, प्रजापालक, प्रजा रक्षक
प्राण से ले... प्रिया तक था।

एक छोटी और झूठी बात पर! 
जीवन जिया जो ब्रह्मवत..! 
अकेले, प्रिय
छोड़ कर, अर्धांगिनी...!

इस लिए दीपावली, दीपोत्सव एक
प्रार्थना...
अभ्यर्थना... है, 
देव से, 
राज्यधिकारी 
मुझे भी, वैसा.. ही दें।
श्री राम सा संकल्पशाली, 
श्री राम सा  ही शक्तिशाली
श्री राम सा ही, प्रजापाली।
प्रभु राम सा शालीनशाली।

जय प्रकाश मिश्र









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