सलाम नहीं, करते, विदाई इसे देते हैं।
मित्रों!
स्थितियों से निपटना एक कला है। हर किसी से हर समय भिड़ना ठीक नहीं। मूल कार्य से हम विविक्त हो जाते हैं। अतः प्रतिक्रिया नहीं, प्रभावी निर्णय लेना चाहिए। इसी पर छोटी सी कविता।
तूफां... है ये, दुश्तर.. है,
थोड़ा सा, झुक.. लेते है
सलाम..... नहीं, करते..
विदाई...., इसे... देते हैं।
चोट..., डालों.. को
लगी...,
पत्तियां.. तो, बच.. गईं,
सख्त... थीं,
वो.... डालियां,
पत्तियां... प्रिय! नरम थीं।
चोट..., डालों.. को
लगी...,
पत्तियां.. तो, बच.. गईं,
सख्त... थीं,
वो.... डालियां,
पत्तियां... प्रिय! नरम थीं।
झुक... गईं, जाने... दिया,
हर... वार तीखा..
पत्तियों ने,
सोचकर, कुछ
समझ कर
माहौल को प्रिय! देखकर..
हर स्थिति को तौल कर..।
डालियों.. ने,
तीव्र....तर
प्रतिक्रिया... दी, टक्कर... लिया,
छलनी हुईं, रथ विरथ हो,
बीरगति शयनी हुईं।
कुछ बच गईं,
सब समझ कर,
समझौता किया,
उन गोलियों संग मिल गईं।
समझौता किया,
उन गोलियों संग मिल गईं।
पत्तियां, कोमल...
नरम.. थीं
मुस्कुराती..,
मुस्कुराती..,
उन सभी से विदा लीं।
गुजर जाएं,
हवा... हैं यह, गोलियां... हैं
चुभती.. हुई, दर्द.. क्यों!
अपमान... भी करतीं हुईं
जाने भी दो,
थोड़ा रुको, समय तो दो
रिस्पांस दो, प्रतिक्रिया मत दो।
आत्म अवलोकन करो...
क्यों... हुआ यह!
विश्लेषण.. करो।
जगह ही वह बंद कर दो।
विप्लवों को ध्वस्त कर दो।
जगह ही वह बंद कर दो।
विप्लवों को ध्वस्त कर दो।
शांति से, समय पर,
किक... नहीं,
उसे... क्रैंक... कर दो।
जय प्रकाश मिश्र
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