तुम! सजग प्रहरी राष्ट्र के, प्लीज इसको छोड़ दो

मित्रों, Gen-Z जेनरेशन, विज्ञान के वरदान में पली बढ़ी, यह सुख सुविधा की आदी, भावी पीढ़ी, हम सबके मेहनत और त्याग की फसल कैसे बिंदक कर देश को नोच डालती है, आज सामने है। विध्वंश कैसा भी हो, दंश देता है। इस पीढ़ी में समझ, और धैर्य पैदा करना होगा अन्यथा ये स्वयं ही नहीं दूसरों के हाथ से देश को भी नष्ट कर जाएंगे। इसी पर आज की लाइने आपके आनंद हेतु प्रस्तुत हैं।

एक, प्रश्न... है! मुझे, सालता..! 
घंटों... नहीं,  
कई... दिनों.. से..
अनवरत...सच! 
रात दिन..
मुझे... व्यथित कर, 
हर एक क्षण... 
मानस... को, मेरे..., बांधता.. है! 

मजबूर करता, 
सोचने.. पर.. 
क्या मचा है, हर तरफ..., 
यह क्यों.. मचा है, हर तरफ...।

वह... प्रश्न है? 
यह, देश..!  किसका?  
मैं चाहता... हूँ, जानना...
जो पिस.. रहे, जो... पीसते हैं ...
या कोई, वो.. और है, 
मैनेज..., जो.. इसको, कर रहा है? 
कोई बता.. दो, समझाओ.. मुझे...
अरे, यह... हुड़दंग!  
कैसा हो रहा है ?  

चलो मानता हूं! 
तुम्हारा... है, 
क्या करोगे? जला दोगे...?
अराजकता..! 
हर जगह ! हर तरह! 
फैला... के 
प्यारे...., 
सजा.. दोगे? 

किसको दोगे? 
पूछता हूँ? 
व्यवस्था को... चरमरा कर तोड़ दोगे..
किस पर गिरेगी गाज, 
इसको सोचना...
कौन होगा साथ, इसको.. सोचना! 

तुम कितने हो! हुड़दंग बहादुर! 
क्या किए हो? 
सोचना... 
देश
को इस, निवेदित... 
आज तक...
निज.. कर्म को भी, तोलना! 

किसके लिए तुम 
लड़ रहे हो! 
और किससे.. लड़ रहे हो! 
अच्छे से इसको 
सोचना।

एक् 
सच कहूं!   
तुम! निपट ही 
आराम... फरमा...,
इक्कीसवीं... इस, सदी.. में 
पैदा.. हुए हो...।
सब.. 
चाहिए.., 
यही जानते हो, 
तुम्हें...प्यारे, 
हक भी अपना मानते... हो! 
मुफ्त में ! सब चाहिए
आराम.. से
सुखों... में, तुम.. पले हो, तुम बढे हो..
देखा नहीं है, 
देश का इस सत्य.. पिछला...
कटु... था, कितना..., 
कभी पूछना.., माता.. पिता.. से।

शिक्षित.. बनाया था तुम्हे...
तकलीफें.. सह कर...
तुम! बवंडर... में, फंसे हो! 
बह.. रहे हो.., 
दुनिया के..
झूठे..., मीडिया.. में,
व्हाट्सएप.. पर, फेसबुक... पर, 
निज हाल.. से,  
हो.., बे-फिकर...
अरे! वह! धोखा... है, सब...।

सब्र रखो, 
मेहनत... करो
कर्म.. से, आगे... बढ़ों। 
बदल दो, जो चाहते हो, 
धैर्य.. से...
तकनीक.. से, नव जागृति से..।

निरुत्साहित..., 
हतोत्साहित... तुम करो
पुरानो... को, 
परिश्रम.  से, विश्वास से...
अगरचे.., वो गलत.. हों
जन जागरण, 
मेरे बच्चों तुम करो।

दोषियों को उजागर कर...
दोष उनका..
सौंप दो, लांक्षणा दो, 
भर्त्सना कर,
पलट दो, 
लूप के उस होल को ही, बंद कर दो।

ये उत्पात क्या है? 
कोई.. रास्ता है?  
तुम!  सजग... प्रहरी, 
राष्ट्र.... के,
प्लीज इसको छोड़ दो!
प्लीज इसको छोड़ दो!

जय प्रकाश मिश्र




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