टुर.. टुपुर.. यह बोलती है,
मित्रों, कुछ लोग हमारे घरों, फैक्ट्रियों, गलियों , सुंदर इमारतों में काम करते हैं, सड़कों पर या ठेलों में सामान बेचते हैं जिनके घरों का कोई पता नहीं होता उनके और उनके परिवार को समर्पित ये लाइने आपको भी प्रेषित हैं आप पढ़ें और आनंद लें।
अरे! यह..
जो, सो.. रहा है,
संतवांसे... हुआ है,
कमजोर है,
बस इस लिए
समय के, पहले हुआ है।
जो, सो.. रहा है,
संतवांसे... हुआ है,
कमजोर है,
बस इस लिए
समय के, पहले हुआ है।
कारण बहुत हैं..
वजह के..
इस..
चल..अभी तूं!
छोड़ उसको, देख! इसको,
परिवार है यह!
भरा.. पूरा.. बल्लियों पर
टंग रही,
काली.. फटी
इन पन्नियों की छांव.. में,
कितने सुखों.. से,
रह रहा!
हां!
घर है ये..
आश्रय है ये,
बरसती.. बरसात में
रुनझुनाती, रिमझिमाती.. शाम में,
चिलचिलाती धूप में,
जलते हुए मध्यान में,
माघ.. पूसी..,
गलाती..,
सर्दियों की, रात में,
घर.. यही है. मित्र! इनका,
एड्रेस! नहीं
तो..,
क्या.. हुआ?
यह आशियाना, इन सभी का..।
प्रिय ठिकाना, इन सभी का..।
एड्रेस! नहीं
तो..,
क्या.. हुआ?
यह आशियाना, इन सभी का..।
प्रिय ठिकाना, इन सभी का..।
जो.. चाहता है, देखना...
प्रिय.. और प्रियतम..प्रियतमा
सब यहां..
नधे.. हैं एक साथ मिलकर
जुआठों में, गृहस्थी के
एक संग,
मधुर संगम है यहां..,
प्रिय! मधुर, संगम है यहां..।
वह..,
उठ गई है, मां.. है, वो..
गहरे... धुंधलके,
उससे..
भी पहले,
बिस्तरों में जागती है,
हर ऋ..तु में...
सोचती है, क्या बनेगा,
कैसे बनेगा, सामांन बिन,
इनके.. टिफिन में।
वह...!
जिम्मेदारी, लिए.. है,
घर.. की इस..,
झूलते कंधों.. पे अपने,
कैसे..! न, उठे...!
जिम्मेदारी, लिए.. है,
घर.. की इस..,
झूलते कंधों.. पे अपने,
कैसे..! न, उठे...!
यद्यपि,
थकी.. थी,
चुक.., चुकी.. थी
डाक्टर ने, कहा था
अभी इससे..., उसी दिन..
आराम कर ले, और कुछ दिन!
खून.. की, खासी कमी... है।
चाहती.. थी,
थोड़ा और सो... ले,
सुबह.. में,
आराम.. कर ले,
पर क्या करे.. परदेश है!
भरोसे..., किसके.. सोए?
जिम्मेदारी, लिए.. है,
घर.. की, इस..
वह...! रे....!
देर... से,
आया है, यह..!
जो, सो... रहा है, बगल में,
इन बच्चियों के..
मैने सुना...,
है...कल अभी,
हफ्ता.. बंटा..था,
खर्चा... कटा था
कुछ ना.. बचा था,
वो*....
इसको.. देंते...!
खर्चा... कटा था
कुछ ना.. बचा था,
वो*....
इसको.. देंते...!
इसी को, तो स्वप्न.. में
वह देखता...,
चिंतित हुआ हुआ,
झगड़ता..
उन... सभी संग
देर.. तक, देख.. न..!
मुंह बजाता..., सो..., रहा.. है।
झगड़ता..
उन... सभी संग
देर.. तक, देख.. न..!
मुंह बजाता..., सो..., रहा.. है।
वह
सोचती है,
काम से, लौटा था कल,
देर.. काफी, देर.. से,
रात.. को यह,
थका मान्दा थक, गया था, काम में,
इसलिए वह सो रहा है,
सो... हि लेने दे उसे..!
थका मान्दा थक, गया था, काम में,
इसलिए वह सो रहा है,
सो... हि लेने दे उसे..!
क्या करेगा
जाग कर वह, लड़ेगा! ही
सबसे.. पहले।
झिड़क देगा,
उसे.., वह हर.. बात पे।
झिड़क देगा, उसे.., वह हर.. बात पे।
अच्छा हुआ यह उठ गई है,
बड़ी.. है,
थोड़ी.. चुटुल भी है, सयानी.. है
टुर.. टुपुर.. यह बोलती है,
सात से, ऊपर.. हुई है ..
तैयार है,
कपड़े पहन कर, सब रख लिया है,
काम पर बाबुओं के घरों में
निकलने, से पहले।
किसको सुनाऊं
व्यथा... इनकी मित्र रे!
जय प्रकाश मिश्र
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