हम भारती, भारत हमारा देश रे।
शीर्षक: हम भारती.., भारत हमारा देश रे।
'कटोरा' था दूध.. का,
बारी.. तक, भरा..,
रखा.. दिखा, सर्प.. के उन बिलों.. पे,
सम्मान से, काल-कुल के द्वार.. पे,
अति प्यार.. से,
कौन है यह..., देश.. रे !
भारत है ये.., भारत.. है ये..।
( हम भारतीय अपने विरोधी का भी ख्याल, ध्यान और आदर करते हैं। क्योंकि विरोध उससे नहीं मात्र उसकी मानसिकता का हम मानते हैं)
पूजते हैं, हम सभी.., उस नाग.. को
जो.. कुटिल है,
कठिन.. है, कराल.. है..
मृत्यु.. का ही, दूसरा.. जो नाम.. है!
पर मान उसका भी है.. यहां..,
इस.. संस्कृति में।
कौन है यह देश? बोलो
एक हिंदुस्तान है, रे..,
बस... एक, हिंदुस्तान... रे।
हम पूजते हैं प्रकृति को..
हर प्राणियों को,
नाग, कच्छप, गाय को,
देवता! हम मानते,
हविष्य देते, भाग देते, जल हैं देते
प्यार... से, हर 'काज' पे।
हर यज्ञ में, हर भोज में, त्यौहार में,
गऊ, कौआ, श्वान को
कौरा खिलाते स्नेह से, अति प्रेम से
पाले गए हर प्राणियों को
विनत.. हो, हर रात.. को।
हम भारती, भारत हमारा देश रे।
पूजते हैं वनस्पतियां.. सकल ही
तुलसिका को लगाते हैं,
घरों में, आंगनों में
सम्मान देकर, पूजते... हैं,
दीपक.. जलाते, टीकते... है
प्रेम.. से।
हम भारती, भारत हमारा देश रे।
बरगद यहां, पीपल यहां,
हर आम.. को,
सम्मान से, हम पूजते हैं,
पूजते हैं, फसल.. को
भोग देते..हैं, अरे! हम..
भूखे ही रह कर, भाव से, अतिप्यार से
त्रैलोक्य... के, भगवान.. को।
कौन हैं, हम... ?
भारती...!
निवासी.. आदि से,
इसी.. भारत, भूमि... के,
इसी.. भारत भूमि के।
हम अलग हैं, सच अलग हैं, विश्व से,
हम अलग हैं, सच अलग हैं, विश्व से।
पग दो
एक फूल खिलता देख कर
उस शाख पर,
दिल... खुश.. हुआ,
पास ही एक आदमी.., तोड़ता..
उन पुष्प को,
जिस.. भी, लिए..
देख कर दिल... दुख गया।
वह पुष्प.. था,
सच!
अरे.. कैसा...
अबोध.. शिशु.. सा,
निडर.. था,
डाल पर उस, हिल रहा।
प्रसन्न था, मगन था, वात के संग खेलता
स्निग्ध कैसा..
सत्य ही...
नवजात 'शिशु सा'
चिकना.., चिकना...
एकटक मुझे.. देखता..।
प्यार.. से,
मासूमियत से
कुछ बोलना ही चाहता.. था,
बस.. तभी...
एक, हाथ.. आया, पार.. से..
खींचता... उस डाल.. को
तोड़ कर उस पुष्प को,
थाल में वह रख लिया,
प्रिय! दिल मेरा सच! दुख गया..।
जय प्रकाश मिश्र
भाव: आइए फूलों को और फूलों की ही तरह निरीह, मासूम अबोध .......... को हम अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझ बचाएं। चाहे वे किसी बाग में खिले हों या देश, धर्म, जाति, वर्ग में पैदा हुए हों।
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