आपको श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई।

सदियां बीती..., 

युग... भी बदला, बदल गया.., 

कितना इंसान...! 

ज्ञान, समर्थित उदय हुआ, 

विज्ञान धरा पर.... 

जीवन.. बदला, 

बदल.. गया, यह.. हिंदुस्तान ।


लेकिन.. तूं, वैसा... का वैसा 

पीढ़ी... दर, पीढ़ी.. 

आज... तलक, 

सबका भगवान, 

आज तलक सबका भगवान।


कुछ तो होगा, नाम में तेरे

खिंच जाता जग,

पास में तेरे....

पाता है, स्प्लास प्रेम का, धार प्रेम की

मीठी मीठी, एक उछल सी, 

उसे.. घेरती, 

तन-मन,  जीवन, में.. 

मधुरस... की

श्री कृष्ण हरि.., श्री कृष्ण हरि..

जप.. पावन करती, पावन.. जप करती।


कितनी.. आंधी, 

तूफ़ाँ... कितने

गरल.. हलाहल.. देखा होगा! 

काल अवधि की, सरिता... में, इस

चलते... फिरते...  

नाम ने, तेरे... ! 

ईश्वरवादी, और अनीश्वर 

आए होंगे, स्याह अंधेरे.., 

राहों.. में तेरे...!

कुछ तो होगा, जीत सका जो

नदी विह्वला, तिरती... तिरती...

अक्षुण्ण रहा यह नाम प्रभु...

यह प्रीति तेरी, सम्मान तेरा, शरणागति तेरी...।

खोज रहा हूँ! 

वही..., अमर.. अमृत मैं, तुझमें..

सद्गति हो मानव की जिससे 

इस आपद में, पहले जैसी।

जय प्रकाश मिश्र


 


बधाई 

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