चलने तो दो... इस जिंदगी को।

परिपेक्ष्य: आज न जाने कितने लोग, कितनी आग सी दहकती दुख दायी समस्याओं से नित्य ही जीवन में आंखे-चार कर रहे हैं और अंदर से उबल भी रहे हैं। जीवन कठिन पथ सा उनके सामने पहाड़ बन खड़ा है। ऐसे में सभी की जिम्मेदारी और दायित्व बनता है कि आचरण में संजीदगी दिखाएं और मिलजुल समाज में सौहार्द्र फैलाएं। अंदर के बढ़े तापमान में यदि बाहर का तापमान भी मिल जाएगा तो समस्याएं आ सकती हैं। अतः कठिन समय में शील, मित्रता, और अपनेपने का परिचय दें। इसी पर कुछ लाइने पढ़ें और आनंद लें।


मत  "फूंक*..." दे,   (dont blow air*)

इस आग... को, 

यह "आग".. है, रे..! 

समझ.., इसको,

मत खेल कर.., मत, ठिठोली कर, 

जल.. उठेगी! 

दूर रह.., 

शुक्र.. कर, बाहर.. नहीं है,

छातियों में.., दबी..है,

अंदर... कहीं है।

पर.. याद रख! ये... "आग"  है ! 

मत "फूंक" दे, 

इस आग... को, यह जल उठेगी! 


आसार! 

क्या... हैं ?

सच..!  अच्छे नहीं हैं, 

लोग, जीवन जी रहे हैं, तिश्नगी... में।

संतोष! 

संतोष, उनमें नहीं, है

पर क्या करें!  

वे..., बच रहे हैं, 

सामने आ..., लपट से, जल..ने  से 

अरे! नहीं रे! 

उन फफोलों से, आज तक 

फूटे नहीं हैं, समय के.. भी थपेड़ों से

इसलिए ये,

बाहर... निकलते, ही.. नहीं हैं

घरों से..।


इस लिए मैं..,  कह रहा हूँ, 

छांव.., दे दो..

रास्ता.. दो, जिंदगी को..।

सब चलें, सुंदर लगें.. 

ये भाव रखो...

जो... भी है, मिलजुल.. 

के "खा" लो...

चलने तो दो... इस जिंदगी को।

अरे, मित्रों!  

चलने भी दो..., इस जिंदगी को।

जय प्रकाश मिश्र

पग दो: 

भाव: आज बड़े से बड़ा देश अपने वैज्ञानिकों, रिसर्चरों को मानव कल्याण में नहीं मानव विनाश के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। और ये विलक्षणता प्राप्त मूर्धन्य लोग जिन्हें मैं पागल ही कहूं लैब्स में विनाश के सामान बनाने में जुटे हैं ऐसे में लोगों का क्या होगा!  इसी पर कुछ लाइने पढ़ें।

अरे मित्रों! 

रिसर्च... के, इन पागलों.. के 

ढेर.. पे, बैठी... है दुनियां! 

देख..!  इसका, क्या.. लिखा है ? 

कुछ.. ही पहले, 

इकठ्ठा हुए हैं.. चीन... में सब!  

छुपते छुपाते, दुष्ट सारे.. 

फिर.. दुबारा....  

लैब.. में

मिलाए.. है, "रसायन" कुछ 

एक दूसरे में, अद्यतन.. 

"ये" मैने सुना है, 

भीषण किया है, कांड कोई! 

देख इसका क्या लिखा है? 

रिसर्चरों के, पागलों.. के 

ढेर पे, बैठी... है दुनियां! 

देख इसका क्या लिखा है।

देख.. इसका, क्या लिखा है।

जय प्रकाश मिश्र

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