चल, छोड़..., सारी, मुश्किलों.. को

माहौल क्या है आज का: जीवन और मुश्किलों का साथ ताना बाना सा है। अलग होतीं ही नहीं एक गई नहीं दूसरी आ जाती है। चलें दोस्ती कर लें इनसे, साथ रहें, मुश्किलों से कड़वाहट कब तक रखे प्यार में बदलें। इसी पर कुछ लाइने पढ़ें और आनंद के लिए मात्र।

चल, छोड़..., 

सारी, मुश्किलों.. को,

मुश्किलों का, क्या... कहूं! मैं...!

सलीके.. से, 

एक भी.., रहती नहीं हैं; 

जब... तक लगाऊं, एक को.., 

गले से.., 

देख..,  ना...तूं

पांव पड़ती, दूसरी...,  कैसे... मेरे हैं।


बिन बताए.., बिना पूछे.., 

हाय! कैसे..

आ... धमकतीं.., आगंतुकों... सी, 

सदी..., पहले की तरह..., 

सच..! कह... रहा हूं! प्रेम में भर..

लिपटतीं.. हैं, 

अश्रुपूरित नेत्र लेकर..

अश्रु-प्लावित नेत्र.. कर, कर..छोड़ती हैं।


बुत बन गई हूं! 

आज मैं 

इन मुश्किलों से, हार कर..., 

जी.. नहीं...! 

समझौता किया है, साथ रह कर!

हम... जिएंगे, उम्र भर.. अब।


"मुश्किलें"... आसान हैं,

ऐसा.. नहीं है, 

अब रोज की ये मित्र हैं.. संग रह रही हैं,

पर... दबाती हैं, 

सांस को ये, हल्के हल्के

सच कह रहा हूँ! 

देख लो..

रेख... पतली, पड़ गई है

लाइनो सी खिंच रहीं हैं, 

रोज ही 

चेहरे... पे मेरे..

उकरती हैं, झुर्रियां.. बन 

क्षण.. अनुक्षण... 

कैसे मिटाऊं! चाहता हूं मिटा दूं !

बनने से पहले... 

मिटती.. नहीं है, दाग इनकी

क्या करूं मैं? 


रुक गई है, उम्र मेरी...,  देखकर...

मैं... मर चुका हूं! 

हैरान... हैं, ये मुश्किलें..., 

क्या करें, अब.. और आगे...

छोड़ कर... खुद जा रही हैं, धीमे.. धीमे..

यही तो संसार है, मुश्किलें हैं

जब तलक, जीवन यहां है 

मुश्किलें हैं।

जय प्रकाश मिश्र


धड़कता है दिल जहां, दिल्ली है वो

वीरानियत... इसकी सड़क पर..

हो कहीं, संभव नहीं है..

रेला है बहता...

हर तरफ...

गजब कैसा.. एक सा

निकल जाओ जिस तरफ.. दिल्ली है वो।

जिंदगी की धार... है..

दिल्ली है, ये...

मज़धार है, यह.. मौज की

दिल्ली है, ये...

शहर देखे, बहुत मैने... ऐसा नहीं..

दिल में सबके बैठ जाए, प्यार बन, 

कुछ इस तरह का शहर सच दिल्ली है ये।

जय प्रकाश मिश्र

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