रोकना जब था उन्हें, उन्हें रोका ही नहीं
पृष्ठरंग: आज भारत ने पहलगाम में धर्म आधारित नृशंस, हत्याओं पर अपना पहला और प्राथमिक ठोस रिस्पांड दिया है। कई जाने माने आतंकी मारे गए, बचे हुए जान की भीख मांग रहे हैं। जो आतंकी पाक में अपने को अविजित व सुरक्षित मानते थे आज भय से परिवार और अपनी जान ले कर भाग रहे हैं। इसी पर कुछ लाइने पढ़ें और आनंद लें।
रोकना..., जब था ... उन्हें..,
तो प्यार.. आया, उन्हीं पर,
आज.. क्यों पछता.. रहा,
कर रहा.. उनकी.. फिकर..।
अरे! ये.... होना ही... था,
बदमाश बच्चे का ये हश्र!
अच्छा हुआ... घर में ठुका
कफ़न.... तो है, मयस्सर..!
छोड़ उनको., सर पे, उनके,
इल्जाम... थे, कई, ख़ून..के
फिक्र.. उनकी, क्यों है, करता
दोजख... ही, था, उनके लिए।
नाग... हैं, वो, इस, जहां में
गली.... में, वे.., जिस... रहें,
क्या उन्होंने,.. डंस लिया है
तेरी.. गली में, आज तुझको।
हीरो.., सुना था, वे हैं होते..
रोता... जहां, जिनके.. लिए,
ये कौन हैं, जिनके जनाजे
चोर... से, निकले शहर... में।
अजहर.., जहर ही था, सदा
इस पार था, या, उस पार.. हो
अब भर चुका, उसका, घड़ा
बस, कुछ ही, समय की, बात है।
न्याय... की दरकार.. थी,
न्याय सच्चा.. हो गया
कालिख पुता, मुंह आज है
पाक की सरकार का।
बोलता... बड़बोल... था
वो आसिफ मुनीर.. है कहां,
पाला पड़ा जब हिंदुओं से
मांद.. में कहां... घुस.. गया।
बोल उससे...
देख ले..., हम... अलग हैं,
उस देश.. से, उस सोच... से
आ.. ठोंकते हैं, घर... में घुस,
आतंकियों को, उनके बाप को।
जय प्रकाश मिश्र
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