दो वक़्त की रोटी कोई उसको दिलाओ

पृष्ठभूमि: आज भारत और पाक के बीच शांति के लिए युद्धविराम घोषित हो गया, निश्चित ही यह अच्छी बात है। आम  "पाक अधिकृत कश्मीर" का आदमी अपनी जिंदगी में नित्य ही युद्ध, जीवन की आम सुविधाओं के लिए भ्रष्टाचार से, अपनों की लालच से, समाज से, दुष्टों से और मौसम आदि से लड़ता आ रहा है। उनके नाम पर जितना बारूद पाक ने इस अनेक युद्धों में जलाया उतना धन यदि पाक अधिकृत कश्मीर के ऊपर खर्च करता तो वह भाग भी हिंदुस्तान के कश्मीर जैसा ही चमन हो जाता। कुछ भी हो बारूद की गंध से ईश्वर मानव जाति की रक्षा करे। इसी पर कुछ लाइने पढ़ें और आनंद लें।पाक अधिकृत कश्मीर के आम लोगों की व्यथा आज कुछ ऐसी ही है.. 

लड़ रहा वह युद्ध ही.. 

नित देखता है...पाता स्वयं को

पैदा हुआ है, जिस घड़ी से...

अकनता है... 

झेलता है दंश इनसे..

हवाओं से, संघर्षणों से, ठंड से

भूख से,  दुष्वृत्तियों से,

वृत्तियों से स्वयं की, 

समाज से, अपनेज़नों से

सज्जनों से, भद्रजन से, मौसमों से, 

दलालों से, भ्रष्टाचार से, कानून से

हर जगह ही..पाक अधिकृत कश्मीर में।

देखता वह, रोज ही है,जिन्दगी में, 

जिंदगी से, जिंदगी की... कुश्तियों में।


शाम को, फिर

हर... सुबह... ही ,

लौटकर, किन... मुश्किलों में, 

घरों में, ऑफिसों.. में, रास्तों.. में, 

मोड पर हर, हर राह में, 

हर एक पल में।


किससे कहे! कैसे कहे! 

वो, 

थक गया है, 

चौधराहट से तेरी अब! 

दूर हो तूं! अलग हो! वो चाहता है

साथ हिन्दुस्तान का..अब

मिलन हिंदुस्तान से।


कौन सा यह.. युद्ध है 

जो लड़.. रहे हैं, आज मिल.. सब, 

इस तरह

मुझको बताओ, 

शामिल है क्या वो..., 

हो रहा ये युद्ध है, 

जिसके लिए। 


अरे! कोई तो, मुझको बताओ! 

क्या चाहता है युद्ध वह, 

यह जो हो रहा है

घर में बैठा, अंधेरों में रो रहा, वह! 

भूख लेकर, अशिक्षा भर, बेरोजगार बन।

है कोई उसका 

अरे वो भूख से है मर रहा...

उसको चुप कराओ।

आजादी की जंग है!  

किसके आजादी की जंग है! 

जा, 

जा कोई उसको बताओ! 

बंद कर दो युद्ध यह, वह चाहता है

दो वक़्त की रोटी कोई उसको दिलाओ।

जय प्रकाश मिश्र





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