उदास फूलों सी रही, ये जिंदगी मेरी,

भाव: जीवन बे-मेल भी जुड़ जाता है कुछ लोगों का अपनो से, और वे पूरा जीवन ही संस्कार तले, अभिजात्य के सुनहरे ललचाते पर्दों के नीचे, समाज की मान्यताओं और जिम्मेदारियों,  गरीबी के चलते या अन्यान्य मजबूरियों के कारण पूरा जीवन ही अभिनय में बिता देते हैं। पुष्प की वास्तविक सुगंध, आनंद से लहलहाने का क्षण और अवसर उनसे छिन जाता है। खास उनके लिए आज की लाइने लिखी गई है। आप आनंद ले ,  माने कि  "नहिं कोउ कर कोउ, सुख दुख दाता"।

पिन-अप रहा,वो
सुनहले,चटकीले,
चटख,चमकीले,रंगीले  
तस्वीर के 
बेइंतिहा लाजवाब, बेशुमार रंगों सा, 
ता-जिंदगी..संग..उसके। 
पर, क्या... दोनों 
कभी... खिल सके!  
मिल... हंस सकें!  
पारिजात... गुलाबी होके!  
हो न... सका। 

इस दुनियां में 
ऋतुएं आईं, बार बार, 
फूल खिले,
जश्ने-बहार, आई,पेड़ों पर
रौनक, चेहरों पर, 
पर, वो, इंतजार… 
करती करती, थक भी गई,
पर वो रंग-ए-तस्वीर ही थे, 
निखालिस,पक्के! 
बिल्कुल मुर्दा !                          
एक बार,भीजीते जी 
कौन कहे! सपने में भी  
संग मिल के मुस्कुरा न सके।

वो, रंग गजब थे,आदाब थे,
तीखे भी थे
खींचते थे, दूर से  
सबसे बढ़ के, आगे सबसे,                   
लगते थे सचमुच कितने अपने  
वहां, उतनी दूर से..।    
पर अहसास..से, वे दूर.. थे,
पर कटे, परिंदे,. थे..!  
सच कह.. दूं! 
साथ..मिल उड़ने की  
ख्वाइश  की रसाई, 
उनको कभी आई ही नहीं।

हाल कुछ ऐसे थे, 
कैसे कह दूं,
मै, सामने सबके, 
आज तलक,देख उन्हें, 
छू कर भी, प्यार में
,
सामने सबके
अंदर से वो,शरमाई ही नहीं।

कौन बताए उन्हें
ये जिंदगी केवल चटख रंग नहीं, 
दिलों की भीनी चाहत.. है, 
बहती है उर में, कोमल अरमान.. लिए, 
बाहर से नहीं, भीतर से कहीं! 
कोई बताए उन्हें...।
ये, प्यार… एक इबादत.. है, 
कौन समझाए उन्हें।
उन्हें!  काम से फुर्सत ही नहीं, 
और मुझे, 
उनकी वो बिजी जिंदगी, 
दुनियादारी भरी....
सच में, कभी... भायी ही नहीं।

उदास फूलों सी रही, 
ये जिंदगी मेरी,
तस्वीर के उन कंदील फूलों सी, 
खिलती भी रही, रोज़, रोज़ सी
देखने... वालो के लिए 
ऊपर... से..
पर आज तलक ढंग से, 
सच कहती हूँ, 
कभी!  
खुल के हंसी खुशी, उन दोनों ने, 
पाई ही नहीं।

जय प्रकाश मिश्र

बेमेल रिश्तों को सादर समर्पित।

Comments

Popular posts from this blog

मेरी, छोटी… सी, बेटी बड़ी हो गई.. जब वो.. पर्दे से

पेंशन बिन जिंदगी, मेरी ये खाली हो गई है।

चलो पेरिस की एक शाम से मिलें!