बहती नदी की मस्ती से दूर मत रहना।
कौन नहीं चाहता, वो सदा प्रथम रहे,
जीवन के हर क्षेत्र में, पहले पहुंचे,
जब भी वो कोई काम करे।
सफलता दुम हिलाती
उसकी अनुगामी बने।
कहना आसान है,
करना दुष्कर।
इसीलिए
अनुभवी
लोगों की
बातें सुनो।
कोई भी फन हो अपना,
स्वाद, बांटो सबसे उसका।
अपनों से, मित्रों से, सुधी लोगों से।
निखर जाएगा फन, देखना,
देखते देखते।
खुश रहना,
उन सभी के साथ,
जो भी हों तुम्हारे
आस पास।
मिल बैठना,
उनके साथ
जो हारते हों
बार बार
छोडते नहीं प्रयास
बिना हुए निराश
लगे रहते हैं
जीत का
चखने
तक
स्वाद।
उनके साथ
उठो, बैठो, बातें करो।
धीरज मत छोड़ो,
आगे बढ़ो।
मिलो उनसे जो दुनियां से
बेखबर, मंजिल की
तलाश में गुम हैं।
हार जीत से
दूर, फन
की
दुनियां में
क्षण प्रति क्षण मशगूल हैं।
जिनके लिए, फन मस्ती है,
दीवानगी है, जिंदगी है,
तुम अपनी जीत जीतने के लिए,
गर मिल सको तो
इनसे भी जरूर मिलो।
आगे ही बढ़ना है अगर, तो
पीछे मुड़ कर, मत देखो,
लोग, क्या कहते है
कभी मत सोचो।
संभावनाएं
देखो
अपने जैसे
जिंदा, दिल के साथ रहो,
पूरी कोशिश से आगे बढ़ो।
सीखो हर चीज से जो
घेरे हर ओर, तुम्हें
बिखरी चुप
बैठी है।
ध्यान
से
देखो, उसे।
उसका
अवधान करो, उन्हीं में से
किसी से मेहनत, किसी से
धैर्य, किसी से तूफान सा लड़ना सीखो।
गुण तो
हर चीज में है
तभी तो वो आज भी,
तुम्हारे सामने जिंदा है।
जिंदा रहने के लिए,
कब, कहां, कितना
नमना, तनना और
भगना जरूरी है,
ये भी इन्हीं से सीखो।
रास्ता क्या है,
वैसा क्यों है
बदलता कैसे,
मिटता क्यों है।
जानने की कोशिश तो करो।
वो रास्ता
किसी का भी हो,
आदमी का,
दरिया का,
तूफान का
गरजते बरसते
जल भरे बादलों का
ही हो।
तुम ध्यान से देखो,
और उसपर चल आगे बढ़ो।
सबकुछ के बाद
भी हमेशा याद रखो।
जिंदगी एक गीत है,
गाने के लिए।
बहता मोहक झरना है
इसके आनंद में नहाने के लिए।
आनंद इसका
पूरी सृष्टि में
एक सा ही फैला है।
तुम्हारी मेहनत में,
आलस में, जीत में,
हार में, संतोष में
प्राप्ति में, वैराग्य में,
गृहस्थ में, सन्यास में।
तुम जहां भी रहना,
इससे दूर मत रहना।
रसभरी, उछलती, खेलती
गाती, नाचती, वंसरी बजाती
नदी के किनारे बसना,
तुम नदी की मस्ती से कभी दूर मत रहना।
जय प्रकाश मिश्र
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