पहले से ही परेशान हैं, और परेशान न करो।

यह देश एक ही था, एक ही है और एक ही रहेगा। यहां रहने वाले एक थे, एक हैं, एक ही रहेंगे। हमारे, कपड़ो का रंग, जीने का तरीका, पूजा पद्धति, और भाषा बोली से देश ऊपर  है।समय चक्र की गति अनेक विवशताएं पैदा करती है और उनके प्रभाव से बचने के लिए अपने अस्तित्व को बनाए रखने, जीवन की रक्षा और बने रहने के लिए समय समय पर अलग अलग मार्ग अपनाना पड़ता है। फिर भी सभी को मिलाकर ही यह देश है, और सभी की उन्नति से ही देश की उन्नति होगी।

इन्ही को भाव में लेकर कुछ लाइने आपको प्रेषित हैं। 


कहा, किसी ने, 

आज तड़के, सबेरे मुझसे

बड़ी संजीदगी से उठना

फिर रहम दिल होके 

पैर रखना जमीं पर, अपने।

कुछ दर्द दिल में रख लेना

चलकर आने की चाहत

जब भी लगे, घर मेरे।


बता दूं इधर मेरे तरफ 

जिंदगी में, पहले....से ही

मन, विचारो और यादों में

रिस रहे घाव हैं, दर्द हैं, 

खून के निसान भी हैं। 

नस्तर..से चुभते, 

किनकते, करकते,

सामान भी हैं। 

हाथो की अंगुलियों में 

नाखूनों के पास निकले 

ताजे सुतरे गुच्छे में हैं,

जो छू जाते ही सिहरा देते हैं,

हमारा, तन, मन, घर, आंगन।


मैं क्या करूं समय ने दिया है

या हमने इकठ्ठा की इतनी

टीस भरी जिंदगी।

की अब

जगह कहां है? बची..

की हम सोच पाएं एक

हंसी खुशी भरी खुशहाल जिंदगी।

खुद और गैर-ए-दोस्तों के लिए।


तुम्हारे कदम दुआ के भी हों

हम पहले, ही सहम जाते हैं,

जब भी पराई आहट पाते है

अपने स्वभाव से ही डर जाते है।

इस हाल में, तुम मेरे लिए,

तुम कुछ कर सको तो थोड़ा

सोच के करो, हम पहले से ही

परेशान हैं, और परेशान न करो।

भरोसा हम भूल गए,

विश्वास धूमिल लगता है।

अब तो कभी कभी 

दीन ए ईमान भी

…… लगता है।

हर बात पे, 

कलझ होती है,

घुटन में जीते हैं।

क्या क्या बताएं तुझे

बेशक तुम तसल्लीबक्श 

बात कहो, भीतर से जलते है।

सच कहूं, मैं अपनी ही 

धड़कनो को सुनकर

बहक जाता हूं।

गैर तो दूर रहें

अपनो में भी अहमक 

कहा जाता हूं।


एहसासे दर्द! 

अब खत्म हुआ।

जा…..ने, 

न ; 

कितने दिन हुए!

अब तो, बस एक…चुभन.. 

सी बनी.. रहती है।

टीस… देती.. है 

हर एक नजर 

बेशक

वो प्यार से भी पड़ती है ।


मेरा इतिहास 

और भूगोल

संग संग चले हैं 

मेरे साथ, बहुत दिन तक,

दिल दरिया बन

बहता रहा, हर दिन, हर पल।

फिर भी 

तेजी और तुर्रा जिनका था, 

वो जानें, 

जो आंधी तूफान से 

आए थे, क्यों वे जाने। 

ताकत से अपनी जो छाए थे

वे जाने।

कुछ तो जरूर, गरूर रहा होगा

तभी तो बहुत कुछ 

नस्तो ना बूद किया होगा।

एक अच्छी जिंदगी की तलाश

या सताए जाने की इंतिहा

पक्ष बदलने के दो ही कारण तो

होते हैं।

इतिहास के पन्नों पर,

कुछ लोग, कभी कभी

कुछ ऐसा कर जाते हैं।

सदियों के लिए वे जुनून में

जमाने को मिटाने के लिए 

दुष कहानियां लिख जाते हैं।


किस्से कहानियां 

पुराने हों, चाहे जितने,

फिर भी, एक ढेर राख की

आखिर वो छोड़ जाते हैं।

उड़ती रहती है वो राख,

आंधियां जब जब 

चला करती हैं।

दृष्टि धूमिल भी 

कर देती है,

जब मन मानस 

से लिपट जाती हैं।


हम भी क्या कहें!

प्यार में झुक जाते हैं;

एक दाग लेते हैं, दिल पे

अपनी ही गलियों से गुजर जाते हैं।

कुछ अच्छा हो सब खुश रहें

अब सभी मिल के दुआ करो।

देश आगे बढ़े, 

सभी मिल के आगे बढ़ें।


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